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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 18, 2016 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

संत बनना आसान है लेकिन मर्यादित होना बहुत जरूरी है: सुरेंद्र देव

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Published: Tue, 18 Oct 2016 01:00 AM (IST)

जागरण संवाददाता, रोहतक : आज की भागदौड़ भरी ¨जदगी व तनावग्रस्त जीवन में मनुष्य के लिए योग क्रियाएं बहु

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जागरण संवाददाता, रोहतक : आज की भागदौड़ भरी ¨जदगी व तनावग्रस्त जीवन में मनुष्य के लिए योग क्रियाएं बहुत जरूरी है। योग एक ऐसी साधना है जिससे मनुष्य अपने शरीर को तो निरोगी कर सकता है, साथ ही दूसरों का मार्गदर्शन करने में सक्षम हो सकता है। यह विचार दिव्य योग मंदिर के चौथे गुरु गद्दी नशीन प्रधान योगाचार्य स्वामी सुरेंद्र देव ने 66वें वार्षिक उत्सव के दौरान लोगों को संबोधित करते हुए प्रकट किए। सुरेंद्र देव ने कहा कि संत बनना बहुत आसान है लेकिन मर्यादित होना बहुत जरूरी है।

आज के दौर में चोला धारण करने वाले संत बहुत मिल जाएंगे, लेकिन शिष्यों व अनुयायियों को सही मार्गदर्शन देने वाले विरले ही होंगे। उन्होंने बताया कि उनके गुरु महाराज रोगी की शक्ल और नब्ज देखकर उसका मर्ज बता दिया करते थे, लेकिन आज के दौर में साइंस बुलंदियों को छू रही है। इसके बावजूद भी पूरे ¨हदुस्तान में जितने अस्पताल है उससे अधिक रोगियों की संख्या में इजाफा हो रहा है। जो एक गंभीर विषय है। समारोह के मुख्य अतिथि उद्योगपति एवं जगमोहन मोटर्स के मालिक जगमोहन मित्तल ने कहा कि वे कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद भी आज परिवार और आपके लोगों के बीच स्वस्थ मुद्रा में खड़े हैं। उन्होंने दावा किया कि योग एक ऐसी पद्धति है अगर मनुष्य अपने जीवन में इसे धारण कर ले तो वह निरोगी काया और सुखी जीवन पा सकता है। बशर्ते योग क्रिया कराने वह सिखाने वाला योग शिक्षक ज्ञानी हो। उन्होंने आज के दौर में बच्चों में हो रही बीमारियों पर ¨चता व्यक्त करते हुए माता-पिता का आह्वान किया कि वह अपने बच्चों को डिब्बाबंद वस्तुओं व कोल्ड्रिंग से परहेज करवाएं अन्यथा देश का भविष्य यह बच्चे मानसिक तौर पर तो कमजोर होंगे ही साथ ही वे शारीरिक रूप से भी स्वस्थ नहीं रहेंगे।

समारोह के अंत में दिव्य योग मंदिर के योगाचार्य अशोक ने मुख्यातिथि जगमोहन मित्तल, डॉ. एचके अग्रवाल व महामंडले‌र्श्वर कपिलपुरी जी महाराज को मंदिर के प्रधान योगाचार्य सुरेंद्र देव महाराज के हाथों से सम्मानित करवाया। समारोह के अंत में भंडारे का भी आयोजन किया गया।