कृष्ण कुमार, रेवाड़ी:

आठ माह और 160 मौत। यह आंकड़ा किसी महामारी या जंग का नहीं है, बल्कि इस वर्ष जिला में हुए सड़क हादसों का है। सड़क हादसों का यह आंकड़ा हैरान करने वाला है लेकिन जरूरी है कि इन आंकड़ों को देखकर न सिर्फ आम आदमी सबक ले बल्कि प्रशासन भी सड़क के सफर को सुरक्षित बनाने के लिए उचित कदम उठाए। ज्यादातर हादसों में या तो तेज रफ्तार या फिर यातायात नियमों की अनदेखी जीवन पर भारी पड़ रही है। बीते आठ महीनों में 285 से अधिक लोग घायल भी हुए हैं जिनमें से कई जीवनभर चल फिर नहीं सकेंगे। रविवार की तड़के दिल्ली-जयपुर हाईवे पर सड़क हादसे में हुई छह लोगों की मौत ने लोगों को हिला कर रख दिया। मरने वालों में नवविवाहित दंपती के अतिरिक्त दो साल का मासूम भी शामिल है। भीषण सड़क हादसों की ऐसी घटनाएं अब अकसर होने लगी है।

नहीं ले रहे सबक

सड़क हादसों में प्रति वर्ष सैकड़ों लोग जान गंवा देते है। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद सड़क हादसों में मरने वालों का आंकड़ा कम होने की बजाय हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। वर्ष 2016 में सड़क दुर्घटना में 631 व्यक्ति घायल हुए थे तथा 281 लोगों की दुर्घटना में मौत हो गई थी। वर्ष 2017 में 553 लोग घायल हुए तथा 289 की मृत्यु हो गई थी। प्रशासन की ओर से यातायात नियम तोड़ने वालों के खिलाफ जीरो टोलरेंस अभियान भी चलाया जा रहा है, लेकिन फिर भी असर नजर नहीं आ रहा। जून व जुलाई माह में बिना हेलमेट के 3786, पीलन राइडर (पीछे बैठने वाली सवारी) बिना हेलमेट के 204, बिना सीट बेल्ट के 1004, तीव्र गति के 167 तथा 76 लाइसेंस सस्पेंड किए गए, गुड्स करियर वाहनों में सवारी बैठाने के 98, गलत पार्किंग के 373, गलत दिशा में चलाने पर 238 व अन्य 6387 चालान किए गए।

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तीन माह पूर्व हुई थी शादी

रविवार को दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जय¨सहपुर खेड़ा बार्डर पर हुए भीषण हादसे में पति-पत्नी व दो वर्षीय मासूम बेटे के अतिरिक्त एक नवदंपती भी काल के मुंह में समा गए। जयपुर के गांव जीतावाला निवासी 22 वर्षीय सुनील व शिवदासपुरा निवासी 21 वर्षीय रेखा ने तीन माह पूर्व ही गृहस्थ जीवन में कदम रखा था। हाथों की मेहंदी भी नहीं सूखी थी कि दोनों का जीवन हादसे ने लील लिया। हादसे में मरने वाले चंपी, नरेश व रेखा तीनों आपस में भाई बहन थे। उनको घर से चलने पर यह अहसास तक नहीं था कि यह यात्रा तीनों भाई बहन की आखिरी यात्रा होगी।

Posted By: Jagran