रेवाड़ी में बस स्टैंड के नाम पर दो गांव आमने-सामने, कोसली और भाकली के बीच बढ़ा विवाद
रेवाड़ी के कोसली और भाकली गांवों के बीच नए बस स्टैंड सब-डिपो के नामकरण को लेकर विवाद गहरा गया है। ...और पढ़ें

कोसली और भाकली गांव के बीच सरकारी परियोजनाओं के नामकरण को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। एआई इमेज
HighLights
कोसली-भाकली बस स्टैंड नामकरण पर विवाद गहराया।
कोसली विकास मंच 'कोसली' नाम पर अड़ा।
भाकली ग्रामीण शहीद सत्यप्रकाश के नाम की मांग।
जागरण संवाददाता, कोसली (रेवाड़ी)। कोसली और भाकली गांव के बीच सरकारी परियोजनाओं के नामकरण को लेकर चला आ रहा विवाद एक बार फिर गरमा गया है। करीब 11 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नए बस स्टैंड के सब-डिपो के नामकरण को लेकर दोनों गांवों की ओर से अलग-अलग मांगें उठने लगी हैं।
नाम में बदलाव करने का कोई औचित्य नहीं
मंगलवार को कोसली विकास मंच के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीण मिनी सचिवालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर निर्माणाधीन बस स्टैंड का नाम कोसली ही रखने की मांग की। इससे पूर्व भाकली के ग्रामीणों की ओर से प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा जा चुका है।
कोसली विकास मंच के अध्यक्ष तेजपाल यादव ने कहा कि बस स्टैंड पहले से ही कोसली के नाम से संचालित था। भवन जर्जर होने के कारण अब इसका दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। ऐसे में इसके नाम में बदलाव करने का कोई औचित्य नहीं है।
पहले भी बन चुकी है सहमति
उन्होंने कहा कि कोसली उपमंडल मुख्यालय है और यहां आसपास के क्षेत्र के लोगों की सुविधाओं के लिए सरकार विभिन्न परियोजनाएं स्थापित करती है। इन परियोजनाओं के लिए आसपास की जमीन अधिग्रहित की जाती है, लेकिन उनका नाम उपमंडल मुख्यालय के नाम पर ही रखा जाता है। तेजपाल यादव ने कोसली और भाकली के बीच परियोजनाओं के नामकरण को लेकर पहले भी आपसी सहमति बन चुकी है।
भाकली के ग्रामीण चाह रहे बलिदानी सत्यप्रकाश का नाम
21 अक्टूबर को भाकली के ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर निर्माणाधीन बस स्टैंड का नाम शहीद सत्यप्रकाश के नाम पर रखने और इसी नाम से इसका उद्घाटन करने की मांग की थी। ग्रामीणों की इस मांग के बाद बस स्टैंड के नामकरण को लेकर दोनों गांवों के बीच एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई।
16 अक्टूबर को विधायक ने किया था भूमि पूजन
गौरतलब है कि 16 अक्टूबर को कोसली विधायक अनिल यादव ने करीब 11 करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नए बस स्टैंड के सब-डिपो का भूमि पूजन किया था। परियोजना का निर्माण कार्य शुरू होने के कुछ ही दिनों बाद नामकरण का मुद्दा फिर सामने आ गया।
