रेवाड़ी के सरकारी हॉस्पिटल में पेमेंट ऑनलाइन या कैश.. दैनिक जागरण की पड़ताल में पढ़ें मरीज किस पर करते हैं भरोसा
रेवाड़ी के सरकारी अस्पतालों में डिजिटल भुगतान की सुविधा शुरू होने के बावजूद मरीज अभी भी नकद भुगतान को प्राथमिकता दे रहे हैं।

मरीजों का भरोसा अभी-भी नकद पर ( एआई जेनरेटेड इमेज )
HighLights
रेवाड़ी अस्पताल में डिजिटल भुगतान की शुरुआत।
81% लेनदेन ऑनलाइन, फिर भी नकद पसंद।
जागरूकता, स्मार्टफोन की कमी मुख्य बाधा।
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। सरकारी अस्पतालों में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए व्यवस्था शुरू कर दी गई है। लेकिन, मरीजों और उनके तीमारदारों का रुझान अभी भी नकद भुगतान की ओर अधिक है।
रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में 16 अक्टूबर से ऑनलाइन भुगतान की सुविधा शुरू की गई है। मंगलवार को दैनिक जागरण की पड़ताल में सामने आया कि अस्पताल में डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड लगाए गए हैं।
मरीजों का भरोसा अभी-भी नकद पर
इसके बावजूद कई मरीज नकद राशि देकर पर्ची बनवाना पसंद कर रहे हैं। हालांकि, अन्य जिलों की तुलना में रेवाड़ी की स्थिति बेहतर बताई जा रही है।
मंगलवार दोपहर तीन बजे तक नागरिक अस्पताल रेवाड़ी में ओपीडी पर्ची और विभिन्न जांचों सहित कुल 2100 लेनदेन में से 1698 भुगतान आनलाइन माध्यम से किए गए।
इस तरह करीब 81 प्रतिशत भुगतान डिजिटल माध्यम से हुआ, जबकि शेष भुगतान नकद किया गया। अस्पताल में पांच रुपये की ओपीडी पर्ची बनवाने से लेकर लैब जांच और सिटी स्कैन सहित विभिन्न सेवाओं के लिए ऑनलाइन भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराई गई है।
दैनिक जागरण की टीम ने अस्पताल में पहुंचकर व्यवस्था का जायजा लिया तो ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए लगी कतार में कई लोग नकद भुगतान करते दिखाई दिए। अस्पताल प्रबंधन ने भुगतान के दोनों विकल्प उपलब्ध रखे हैं, जिससे मरीजों को किसी एक माध्यम से भुगतान करने के लिए बाध्य नहीं होना पड़ रहा है।
स्मार्टफोन और इंटरनेट की कमी भी बाधा
डिजिटल भुगतान की राह में तकनीकी दिक्कतों के साथ जागरूकता की कमी भी सामने आ रही है। सरकारी अस्पतालों में आने वाले मरीजों में बुजुर्गों और महिलाओं की संख्या भी काफी है। इनमें से कई लोगों के पास स्मार्टफोन नहीं है।
वहीं, जिनके पास स्मार्टफोन है, उनमें से कुछ के पास इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में वे नकद भुगतान करना अधिक आसान समझते हैं।
ओपीडी पर्ची बनवाने के लिए कतार में खड़े रामकुंवार, बृजेश कुमार, ब्रह्मदत्त और सुरेंद्र सिंह ने बताया कि जिन्हें इंटरनेट और डिजिटल भुगतान की जानकारी है, उनके लिए यह सुविधा सहज है। लेकिन जिन लोगों को इसकी जानकारी नहीं है, उन्हें परेशानी होती है।
इसके अलावा साइबर धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के कारण भी कुछ लोग ऑनलाइन भुगतान करने में भरोसा नहीं करते।
कोसली में भी तकनीकी समस्या
कोसली नागरिक अस्पताल में भी मंगलवार को करीब 200 ओपीडी रही। यहां नए मरीजों में कुछ ने पांच रुपये की पर्ची बनवाने के लिए नकद भुगतान किया।
अस्पताल में डिजिटल भुगतान के बाद राशि प्राप्त होने की पुष्टि के लिए साउंड सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन कोसली में इस व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी दिक्कत अधिक देखने को मिली। इससे कर्मचारियों को भुगतान की पुष्टि करने में परेशानी हो सकती है।
अस्पताल में आनलाइन भुगतान की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। मरीजों और उनके तीमारदारों को डिजिटल भुगतान के बारे में जागरूक किया जाएगा। जिन लोगों को आनलाइन भुगतान करने में परेशानी होती है, उनके लिए नकद भुगतान का विकल्प भी उपलब्ध है। नई व्यवस्था के प्रति लोगों की समझ बढ़ने के साथ डिजिटल भुगतान को और प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। -डा. इंद्रजीत यादव, उपचिकित्सा अधीक्षक, नागरिक अस्पताल रेवाड़ी
यह भी पढ़ें- पारंपरिक हुनर को मिली आधुनिक रफ्तार, महराजगंज में दीपावली की आहट के बीच चाक पर दिनभर में आकार ले रहे डेढ़ हजार दीये
