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रेवाड़ी में 263 दिन में सड़क हादसों में चली गईं 96 जानें, हाईवे के ब्लैक स्पॉट बड़ा कारण

Published: Sun, 20 Sep 2026 02:28 PM (IST)

रेवाड़ी जिले में इस वर्ष 263 दिनों में सड़क हादसों में 96 लोगों की जान चली गई है, जिनमें से ...और पढ़ें

इस वर्ष 263 दिनों में सड़क हादसों में 96 लोगों की जान चली गई।

इस वर्ष 263 दिनों में सड़क हादसों में 96 लोगों की जान चली गई।

HighLights

  1. रेवाड़ी में 263 दिनों में 96 लोगों की सड़क हादसों में मौत।

  2. 90% हादसे हाईवे पर तेज रफ्तार, ब्लैक स्पॉट से हुए।

  3. 18-40 आयु वर्ग, दोपहिया वाहन चालक हादसों के प्रमुख शिकार।

जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। नेशनल हाईवे पर सफर जितना आरामदायक है, उतनी ही जरा सी चूक के कारण खतरनाक भी है। इस वर्ष के 263 दिनों की बात करें तो जिले में अलग-अलग सड़क हादसों में 96 लोगों की जान चली गईं। इनमें 90% हादसे जिले की सीमा से गुजर रहे तीनों हाईवे पर हुए। हादसों के कारण भी अलग-अलग रहे। ज्यादातर हादसे तेज रफ्तार और ब्लैक स्पाट के कारण हुए हैं।

दरअसल, हर साल जिले में करीब 150 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो जाती है, जबकि इससे कहीं अधिक लोग घायल होकर जीवनभर के लिए दिव्यांगता का दंश झेलने को मजबूर होते हैं। जिले से गुजर रहे दिल्ली-जयपुर, रेवाड़ी-रोहतक और रेवाड़ी-जैसलमेर हाईवे पर वाहनों की तेज रफ्तार और ब्लैक स्पाट हादसों का बड़ा कारण है।

वर्ष 2026 के 263 दिन बीत चुके हैं और जनवरी से सितंबर तक जिले में 186 सड़क हादसों में 96 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 203 लोग घायल हुए हैं। सड़क हादसों में वर्ष 2025 में 189 लोगों की जान गई थी। वर्ष 2024 में 209 तथा 2023 में 213 लोगों की सड़क हादसों में मौत हो गई थी। इस वर्ष पुलिस ने लापरवाही से वाहन चलाने वाले 250 से अधिक चालकों के खिलाफ कार्रवाई भी की है।

पूरा परिवार हो गया खत्म

25 मई को नारनौल रोड पर हुए हादसे में एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई थी। बेटे का स्कूल में प्रवेश कराने के बाद वापस लौट रहे दंपति की कार को ट्रक ने टक्कर मार दी थी, जिसमें बेटे सहित दंपति की माैत हो गई थी। वहीं जुलाई में हाईवे पर साल्हावास के समीप हुए हादसे में दो सगे भाइयों की जान चली गई।

एनएच-11 पर ये स्थान बने ब्लैक स्पॉट

एनएच-11 यानी रेवाड़ी-जैसरमेर हाईवे के निर्माण के बाद वाहनों की रफ्तार बढ़ गई है। खोरी-गोविंदपुरी फ्लाईओवर के पास, माजरा मोड़ और पाड़ला कट हादसों के प्रमुख स्थान बने हुए हैं। खोरी-गोविंदपुरी फ्लाईओवर के निकट आए दिन हादसे सामने आ रहे हैं।

एनएच-48 पर दर्जनों स्थान संवेदनशील

दिल्ली-जयपुर हाईवे पर जयसिंहपुर खेड़ा बार्डर से कापड़ीवास ब\र्डर तक करीब 35 किलोमीटर हिस्सा जिले में आता है। कापड़ीवास, बनीपुर चौक, ओढ़ी कट, जयसिंहपुर खेड़ा, संगवाड़ी, असाही पुल, भूड़ला, साहबी पुल, आसलवास, नैचाना कट और साल्हावास सहित कई स्थान हादसों के लिहाज से संवेदनशील हैं।

बनीपुर चौक और नैचाना कट पर आए दिन हादसे होते हैं। बनीपुर चौक फ्लाईओवर का निर्माण लंबे समय से लंबित है। क्रासिंग बंद होने के बावजूद वाहन चालक डिवाइडर के ऊपर से मोटरसाइकिल निकालते हैं। पैदल यात्री भी हाईवे पार करते समय जान जोखिम में डालते हैं। कापड़ीवास से भिवाड़ी की ओर जाने वाला टर्न भी दुर्घटना की दृष्टि से संवेदनशील है।

एनएच-352 पर भी कई ब्लैक स्पॉट

रेवाड़ी-रोहतक हाईवे पर गांव बीकानेर, रोहड़ाई मोड़, गुरावड़ा और पाल्हावास हादसों के प्रमुख स्थान हैं। पाल्हावास चौक पर पिछले एक माह में तेज रफ़्तार की वजह से तीन हादसों में वाहन घर या दुकानों में घु़स गए थे।

70 प्रतिशत मृतक 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के

इस वर्ष सड़क हादसों में जान गंवाने वाले 96 लोगों में करीब 70 प्रतिशत मृतक 18 से 40 वर्ष आयु वर्ग के हैं। 40 से 60 वर्ष आयु वर्ग के मृतकों की संख्या 20 प्रतिशत, जबकि अन्य आयु वर्ग के लोगों की हिस्सेदारी 10 प्रतिशत रही।

दोपहिया वाहन चालकों की सबसे ज्यादा मौत

हादसों के आंकड़ों पर नजर दौड़ाएं तो इस वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों में करीब 60 प्रतिशत दोपहिया वाहन चालक या सवार रहे। 30 प्रतिशत मृतक चौपहिया वाहनों में सवार थे, जबकि 10 प्रतिशत पैदल यात्री थे। आंकड़ें बताते हैं कि तेज रफ्तार के साथ यातायात नियमों की अनदेखी दोपहिया वाहन चालकों के लिए विशेष रूप से घातक साबित हो रही है।

सड़क हादसों को लेकर पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाती रही है। इसके अलावा हादसों को रोकने के लिए काफी ब्लैक स्पाट भी बंद किए जा चुके हैं। लोगों को भी वाहन चलाते समय यातायात नियमों की पालना करनी चाहिए, जिससे हादसों में कमी आ सके। - पवन कुमार, डीएसपी ट्रैफिक

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