एक बार फिर रेवाड़ी शहर ‘टापू’ बनने को तैयार, प्री-मासनून की आहट के बाद गंदगी से अटे पड़े नाले
रेवाड़ी में प्री-मानसून की आहट के बावजूद नालों की सफाई नहीं हुई है, जिससे जलभराव और बीमारियों का खतरा बढ़ ...और पढ़ें
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गढ़ी बोलनी रोड पर अवरूध पड़ा बरसाती नाला। जागरण
HighLights
उपायुक्त दे चुके शहर के सभी की सफाई के आदेश
जिम्मेदार इस बार भी टेंडर प्रक्रिया शुरू करने में सुस्त
29 मई के बाद प्री-मानसून की वर्षा शुरू होने का अनुमान
जागरण संवाददाता, रेवाड़ी। प्री-मानसून की आहट के बावजूद शहर में बरसाती पानी की निकासी के लिए बनाए गए नालों की सफाई नहीं हुई है। शहर के मुख्य मार्गो, बाजार की सड़कों के साथ गंदे पानी की निकासी के लिए बने नालों की सफाई समय पर नहीं होने से वर्षा के दिनों में एक बार फिर शहर पानी-पानी नजर आ सकता है।
हर साल की तरह इस बार भी जिम्मेदारों की लापरवाही साफ नजर आ रही है, जिससे आने वाले दिनों में जलभराव और बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि उपायुक्त की ओर से मानसून आने से पहले शहर के सभी नालों की सफाई करने के आदेश दिए हुए हैं। बावजूद इसके नप की ओर से अभी तक नालों की सफाई के लिए सभी टेंडर नहीं किए गए हैं।
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मिनी बाईपास पर राजीव नगर के निकट गंदगी से अटा पड़ा नाला। जागरण
दरअसल, शहर में अलग-अलग लोकेशन पर छोटे-बड़े 10 से अधिक नाले हैं, जिनमें कई जगह नाले कचरे, प्लास्टिक और गाद से भरे पड़े हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से बरसात के दिनों में 10 एमएम वर्षा होते ही जलभराव की स्थिति बन जाती है। शहर में नालों की सफाई अधूरी है तो कहीं शुरू ही नहीं हुई।
आवागमन प्रभावित होता है और हादसों का डर बना रहता है। प्री-मानसून तैयारी के तहत नगर परिषद को समय रहते नालों की सफाई, मरम्मत और जल निकासी व्यवस्था दुरुस्त करनी चाहिए थी, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका असर नजर नहीं आ रहा। कई जगह नालों के ऊपर अतिक्रमण भी जल निकासी में बाधा बन रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर समय रहते नालों की सफाई नहीं हुई तो मानसून में हालात और बिगड़ सकते हैं। जलभराव से न केवल ट्रैफिक प्रभावित होगा, बल्कि डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ेगा। स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से जल्द से जल्द सफाई अभियान चलाने और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, ताकि मानसून से पहले शहर को जलभराव की समस्या से राहत मिल सके।
