गोबिद सिंह, रेवाड़ी परिस्थितियां विपरीत होने पर अकसर लोग हौसला छोड़ देते हैं, लेकिन ऐसे भी कुछ लोग हैं जो विपरीत परिस्थितियों में भी आगे बढ़ने का रास्ता ढूंढ लेते हैं। ऐसे ही गांव भठेड़ा निवासी कुलजीत यादव हैं, जिन्होंने कोरोना काल में परिस्थितियां विपरीत होने के बावजूद स्वावलंबन की राह ढूंढ निकाली। कुलजीत कोरोना काल में लगाए गए वर्मी कंपोस्ट (केंचुआ खाद) के प्लांट से आज लाखों रुपये कमा रहे हैं। कोरोना महामारी के चलते गत वर्ष लगे लाकडाउन के चलते जब सभी सेवाएं बंद हो गई थीं, उस समय कुलजीत ने कोरोना काल में कुछ अलग करने की ठानी और उनका प्रयोग सफल रहा। एक एकड़ में लगाया हुआ है वर्मी कंपोस्ट का प्लांट कोरोना काल में स्कूल बंद होने के बाद कुलजीत यादव ने कुछ अलग करने का मन बनाया और कृषि विज्ञान केंद्र रामपुरा के वैज्ञानिक डा. अनिल कुमार से संपर्क किया। डा. अनिल कुमार ने कुलजीत को वर्मी कंपोस्ट का प्लांट लगाने के लिए प्रोत्साहित किया, क्योंकि कुलजीत ने पहले से ही कृषि विज्ञान केंद्र से वर्मी कंपोस्ट के संबंध में प्रशिक्षण लिया हुआ था। विशेषज्ञ की सलाह मानकर कुलजीत ने अपने बेटे के साथ एक एकड़ में वर्मी कंपोस्ट का प्लांट लगाकर काम शुरू कर दिया। उनकी मेहनत रंग लाई और आज कुलजीत वर्मी कंपोस्ट के प्लांट से सालभर में 15 लाख रुपये की कमाई कर रहे हैं। पहले एक एकड़ में फसलों से मुश्किल से एक लाख रुपये तक की कमाई हो पाती थी। दूसरे राज्यों में भी जाता है कुलजीत के प्लांट का वर्मी कंपोस्ट कुलजीत ने बताया कि उन्होंने एक एकड़ में वर्मी कंपोस्ट का प्लांट लगाया हुआ है, जिसमें 150 बैड बनाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि वर्मी कंपोस्ट करीब दो माह में तैयार हो जाता है। एक बेड से 600 क्विंटल के करीब वर्मी कंपोस्ट तैयार होता है। वह सालभर में 9 लाख रुपये का वर्मी कंपोस्ट तथा 6 लाख रुपये का केंचुएं की बिक्री कर देते हैं। उन्होंने बताया कि उनका वर्मी कंपोस्ट हरियाणा के अलावा दिल्ली, यूपी और राजस्थान में जाता है। उन्होंने बताया कि अब वह चार एकड़ में वर्मी कंपोस्ट का प्लांट लगाने की तैयारी कर रहे हैं। उन्होंने युवाओं को कोरोना काल में निराश न होकर अपना रोजगार शुरू करने की अपील की।

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