रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। 14 जुलाई को केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी हरियाणा को लगभग 12 हजार करोड़ की सड़क परियोजनाओं का तोहफा देंगे। इन परियोजनाओं में महेंद्रगढ़-पेहवा (कुरुक्षेत्र) ग्रीन फील्ड हाइवे व सामरिक महत्व के रेवाड़ी-जैसलमेर राजमार्ग संख्या-11 का रेवाड़ी-नारनौल भाग मुख्य रूप से शामिल है। इसके अलावा रेवाड़ी, अटेली व नारनौल बाइपास का भी शिलान्यास होगा।

इनमें अधिकांश परियोजनाएं दक्षिण हरियाणा से जुड़ी है। प्रभावक्षेत्र से जुड़ी होने के कारण केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत इसे मौके को राजनीतिक रूप से भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। अभी से इसकी तैयारी शुरू कर दी है।

राव ने बताया कि कार्यक्रम वर्चुअल होगा, मगर तकनीक से जन भागीदारी सुनिश्चित होगी। कई स्थानों पर बड़ी स्क्रीन लगवाई जाएगी। गडकरी जिन परियोजनाओं का शिलान्यास करेंगे, उनमें से कुछ पर काम जारी है। लॉकडाउन व अन्य कारणों से शिलान्यास नहीं हुआ था।

किस परियोजना पर कितना होगा खर्च

नारनौल में प्रस्तावित 24 किमी लंबे बाईपास से महेंद्रगढ़, भिवानी, रोहतक, जींद, कैथल, करनाल व कुरुक्षेत्र जिलों से होते हुए पेहवा के निकट नेशनल हाईवे नंबर 152 में मिलने वाले ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण पर 9 हजार करोड़ की लागत आएगी। इस मार्ग से आगे अंबाला होते हुए सीधे चंडीगढ़ पहुंचना सुगम होगा। इसका निर्माण छह चरणों में होगा। रेवाड़ी-नारनौल हाईवे पर अटेली-नारनौल बाईपास सहित 2300 करोड़ खर्च होंगे। नारनौल रोड से राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-352 (रेवाड़ी-रोहतक हाईवे) तक प्रस्तावित 14 किमी लंबे रेवाड़ी आउटर बाइपास पर 800 करोड़ ाखर्च होंगे। रेवाड़ी-पटौदी-गुरुग्राम के 46 किमी लंबे भाग पर 1500 करोड़ की लागत आएगी। गडकरी इसी दिन इसका भी शिलान्यास करेंगे। इसे कुछ समय पूर्व ही नेशनल हाईवे का दर्जा दिया गया था।

रेवाड़ी-जैसलमेर परियोजना

यह परियोजना कुल 848 किलोमीटर लंबी है। सामरिक महत्व के अलावा इसका पर्यटन की दृष्टि से भी महत्व है। निर्माण पूरा होने पर हरियाणा व राजस्थान के मध्य शेखावाटी क्षेत्र के पर्यटकों के लिए एक बेहतरीन पर्यटन गलियारा होगा। मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने केंद्रीय मंत्री राव की मांग पर 4 जुलाई 2015 को रेवाड़ी के जिस आउटर बाईपास की घोषणा की थी, वह अब इसी राजमार्ग का हिस्सा है। शिलान्यास के साथ रेवाड़ी व मानेसर-बावल इंवेस्टमेंट रीजन (एमबीआइआर) जैसे दक्षिण हरियाणा के छोटे शहर महानगर बनने की ओर अधिक तेजी से अग्रसर होंगे।

 

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