विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jun 19, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Rewari News: ढाई साल बाद भी नहीं मिला जमीन का पजेशन, 132केवी बावल सब स्टेशन का निर्माण अटका

Published: Thu, 19 Jun 2025 02:00 PM (IST)

बावल औद्योगिक क्षेत्र में 132 केवी सब-स्टेशन का निर्माण भूमि आवंटन में देरी के कारण अटका हुआ है। एचवीपीएन और ...और पढ़ें

बावल औद्योगिक क्षेत्र की फाइल फोटो। सौजन्य- जागरण
बावल औद्योगिक क्षेत्र की फाइल फोटो। सौजन्य- जागरण

HighLights

  1. भूमि आवंटन में देरी मुख्य कारण |
  2. बिजली आपूर्ति बाधित होने की आशंका |

गोबिंद सिंह, रेवाड़ी।  बावल औद्योगिक क्षेत्र में 132केवी का नया सब स्टेशन बनाने की योजना जमीन का पजेशन नहीं मिलने के कारण धरातल पर नहीं उतर पाई है। जबकि एचवीपीएन (हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम) की ओर से सब स्टेशन निर्माण के लिए एचएसएसआइआइडीसी (हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम) को लगभग ढाई वर्ष से लगातार पत्राचार किया जा रहा है, लेकिन ढाई वर्ष बाद भी एचवीपीएन को जमीन की पजेशन ही नहीं दी गई है।

ऐसे में औद्योगिक इकाइयाें को निर्बाध रूप से बिजली आपूर्ति की उम्मीदों पर ब्रेक लगा हुआ है। गर्मी के सीजन में औद्योगिक इकाइयाें को ओवरलोडिंग के कारण फाल्ट और अघोषित कटों का सामना करना पड़ता है जिससे औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन भी प्रभावित होता है। ढाई वर्ष बाद भी किसी परियोजना के लिए जमीन नहीं मिलना अपने आपमें बड़ा सवाल है।

दरअसल एचवीपीएन की तरफ से जगह की कमी को देखते हुए दो वर्ष पहले धारूहेड़ा और बावल में गैस आधारित तकनीक पर सब स्टेशन बनाने की योजना बनाई थी। इस योजना को वित्त वर्ष 2023-24 में मुख्यालय से अनुमति भी मिल गई थी। उसके बाद मुख्यालय की तरफ से दोनों सब स्टेशनों का बजट भी मंजूर कर दिया गया था।

बावल में गैस आधारित तकनीक पर बनाए जाने वाले 132 केवी सब स्टेशन पर 42 करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं, लेकिन जमीन का पजेशन नहीं मिलने के कारण टेंडरिंग का कार्य रुका हुआ है। वहीं धारूहेड़ा में बनने वाले सब स्टेशन की टेंडरिंग प्रक्रिया चल रही है।

जीआइएस तकनीक में होती है कम जगह की आवश्यकता

जीआइएस (गैस इंसुलेटिड सब स्टेशन) तकनीक पर आधारित सब स्टेशन महंगी जमीन वाले एरिया में स्थापित किए जाते हैं। इसमें आधा एकड़ जमीन की ही जरूरत होती है जबकि सामान्य सब स्टेशन के निर्माण के लिए दो एकड़ से अधिक जगह की जरूरत होती है। जीआइएस सब स्टेशन में उपकरण नजदीक नजदीक होते हैं और उसमें गैस भरी जाती है।

हमने अनुमति के लिए मुख्यालय को लिखा हुआ है। अनुमति मिलते ही हरियाणा विद्युत प्रसारण निगम को जमीन की पजेशन दे दी जाएगी।

- अशोक यादव, सहायक महाप्रबंधक, एचएसआइआइडीसी बावल

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।