नई दिल्ली/रेवाड़ी  [महेश कुमार वैद्य]। तीनों केंद्रीय कृषि सुधार कानूनों का विरोध कर रहे संयुक्त किसान मोर्चा के 26 जून को प्रस्तावित धरना-प्रदर्शन कार्यक्रम से कांग्रेसी नेता असहज हैं। कांग्रेस को मोर्चा के कार्यक्रम से नहीं, बल्कि तारीख से आपत्ति है। इमरजेंसी की वर्षगांठ को केंद्र में रखकर की जा रही राजभवनों के बाहर धरने की तैयारी कांग्रेस को नागवार लगी है। मोर्चा से जुड़े किसान नेताओं के बोल व कार्यक्रम की रूपरेखा से गुस्साए कुछ कांग्रेसी नेता तो अपनी पार्टी को कृषि कानून विरोधियों के आंदोलन को दिए जा रहे समर्थन पर पुनर्विचार की सलाह दे रहे हैं। हरियाणा के पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा के अलावा पूर्व मंत्री और लालू प्रसाद यादव के समधी कैप्टन अजय सिंह यादव भी संयुक्त किसान मोर्चा के इस रुख से बहुत नाराज हैं।

इस पर कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता वेदप्रकाश विद्रोही ने कहा कि उनकी पार्टी का रुख हमेशा स्पष्ट रहा है। हमने किसानों की मांग का खुलकर समर्थन किया है, मगर ऐसा लगता है जैसे आंदोलन से जुड़े कुछ किसान नेता इमरजेंसी के बहाने अपने लिए राजनीतिक जमीन तलाश रहे हैं। इन नेताओं को किसानों से अधिक अपने राजनीतिक हित की चिंता है। इनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा किसान हितों पर भारी है। विद्रोही ने कहा कि आपातकाल के नाम पर गड़े मुर्दे उखाड़ना गलत है। इमरजेंसी का कोई भी समर्थन नहीं करता। इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, मनमोहन सिंह, सोनिया गांधी व राहुल गांधी सहित कांग्रेस के सभी बड़े नेताओं ने इसे गलती मानते हुए खेद भी व्यक्त किया है। इतना होने पर भी किसान मोर्चा के नेताओं का दिवंगत पीएम इंदिरा गांधी को नाम लेकर अशोभनीय बातें करना और आपातकाल को लोकतंत्र का काला अध्याय बताकर प्रदर्शन का कार्यक्रम तय करना दुखद है।

भूपेंद्र सिंह हुड्डा (विपक्ष के नेता व पूर्व मुख्यमंत्री) ने कहा कि अगर 26 जून की तारीख आपातकाल और इंदिरा गांधी को लक्ष्य करके तय की गई है तो यह गलत है। यह मोर्चा से जुड़े नेताओं की अपनी राजनीति है। कांग्रेस तीनों कृषि सुधार कानूनों के विरोध में है। हमारी पार्टी ने संयुक्त किसान मोर्चा को नहीं बल्कि किसानों को समर्थन दिया हुआ है। अगर मोर्चा के नेता कांग्रेस को नीचा दिखाने के मकसद से तारीख तय कर रहे हैं तो यह उचित नहीं है। इससे बचा जाना चाहिए।

वहीं, कैप्टन अजय सिंह यादव (पूर्व मंत्री) का कहना है कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेताओं को ऐसा कोई काम नहीं करना चाहिए, जिससे आंदोलन कमजोर हो। कांग्रेस का अपना दृष्टिकोण स्पष्ट है। हम तीनों कानूनों का विरोध करते हैं। हम संयुक्त मोर्चा की मजबूती के लिए नहीं बल्कि कांग्रेस के अपने दृष्टिकोण के कारण किसानों का समर्थन करते हैं। व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा किसी भी आंदोलन को कमजोर बनाती है। 

वेदप्रकाश विद्रोही (हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता) का कहना है किसंयुक्त किसान मोर्चा के कुछ नेता निजी हित की लड़ाई लड़ रहे हैं। धरना-प्रदर्शन के 26 जून के कार्यक्रम को आपातकाल से जोड़ना कांग्रेस को सीधी चोट पहुंचाने वाला है। मैं अपनी पार्टी के नेताओं से सार्वजनिक रूप से यह अनुरोध करता हूं कि आंदोलनकारियों को दिए जा रहे समर्थन पर पुनर्विचार करे।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस कृषि सुधार कानूनों का विरोध करती है, मगर मोर्चा के नेताओं की कांग्रेस व इंदिरा गांधी को लेकर की गई बयानबाजी निंदनीय है। राकेश टिकैत, गुरनाम सिंह चढूनी व योगेंद्र यादव जैसे नेताओं का इमरजेंसी की आड़ में राजनीतिक महत्वाकांक्षा पालना दुर्भाग्यपूर्ण है

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