महेश कुमार वैद्य, रेवाड़ी

संवाद शक्ति है। संवाद (डायलाग) समाधान की राह है। वैचारिक मतभिन्नता के बावजूद अगर अलग-अलग संगठनों व व्यक्तियों के बीच संवाद होगा तो सहिष्णुता भी बढ़ेगी व हर समस्या का समाधान भी निकलेगा। बृहस्पतिवार को नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के मुख्यालय में संघ शिक्षा वर्ग के तृतीय वर्ष के समापन अवसर पर दिए गए पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के भाषण का निचोड़ यही है। संतरों के शहर में दिए गए प्रणब दा के भाषण की मिठास का असर ऐसा है कि हरियाणा के वरिष्ठ कांग्रेसी नेता व पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा भी दलगत दृष्टिकोण को छोड़कर संवाद से जुड़ी पूर्व राष्ट्रपति की बातों का खुलकर समर्थन कर रहे हैं। संघ पदाधिकारी भी खुश हैं।

यह माना जा रहा है कि विवाद उठने के बावजूद प्रणब दा के नागपुर जाकर संघ शिक्षा वर्ग को संबोधित करने से संघ की स्वीकार्यता बढ़ेगी। संघ को अछूत समझने वालों को सबक मिलेगा। वैचारिक मतभिन्नता के बावजूद एक दूसरे से संवाद करने की सोच बढ़ेगी, जिससे लोकतंत्र परिपक्व होगा। जागरण ने भूपेंद्र ¨सह हुड्डा व संघ के प्रांत कार्यवाह डीपी भारद्वाज से प्रणब दा के भाषण को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत है दोनों से बातचीत के मुख्य अंश: प्रणब के संबोधन से सहमत: हुड्डा

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र ¨सह हुड्डा ने जागरण से बातचीत में कहा कि प्रणब मुखर्जी जैसे वरिष्ठ नेता को किसी सलाह की जरूरत नहीं थी। उनका नागपुर जाना उनका अपना निर्णय है। उनके इस निर्णय को लेकर मैं किसी तरह की टिप्पणी नहीं करूंगा। वे वरिष्ठ राजनीतिज्ञ हैं। उन्हें यह अच्छी तरह पता है कि कहां जाना चाहिए और कहां नहीं। उनके संबोधन के सब अपने-अपने हिसाब से अर्थ लगाएंगे, लेकिन मेरा यह मानना है कि उन्होंने संवाद (डायलाग) की जो पैरवी की है, उसके निहितार्थ गहरे हैं। जहां आपस में संवाद होगा, वहां निसंदेह समस्याओं का समाधान भी निकलेगा। मैं इस बहस में नहीं पड़ना चाहता कि उन्होंने संवाद कायम रखने की बात कहकर किसे आइना दिखाया और किसे नहीं, लेकिन मैं उनके संबोधन से सहमत हूं। राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों व अलग-अलग विचार वाले लोग एक दूसरे की बात ध्यान से सुनें और खुद की कहें, इससे बेहतर क्या हो सकता है। एक-दूसरे से अलग विचार रखने का हक सबको है। जबरन अपनी विचारधारा किसी पर थोपना गलत है। कांग्रेसियों के लिए भी खुले हैं संघ के द्वार: भारद्वाज

आरएसएस के प्रांत कार्यवाह डीपी भारद्वाज का कहना है कि प्रणब मुखर्जी के नागपुर दौरे पर विवाद उठना समझ से परे है। संघ तो वर्षों से समाज के प्रतिष्ठित लोगों को अपने मंचों पर बुलाता रहा है। संघ के दरवाजे सभी विचारधाराओं व सभी पूजा पद्धतियों के लिए खुले हुए हैं। संघ ने तो कभी कांग्रेसियों के लिए भी दरवाजे बंद नहीं किए। कांग्रेस ने ही अपना नियम बना रखा है कि संघ की शाखाओं से दूर रहना है। संघ तो स्वतंत्रता का सदैव सम्मान करता आया है। हम तो दूसरों के विचारों को सुनने व अपना काम दिखाने के लिए सतत संवाद की पैरवी करते रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति के विचार सुनने के लिए ही उन्हें आमंत्रित किया था। कुछ लोगों ने अकारण का विवाद पैदा किया, लेकिन इससे संघ को कोई नुकसान नहीं हुआ है। इसके विपरीत उन लोगों को भी संघ के बारे में सही जानकारी मिली है, जिनके दिमाग में संघ के प्रति नफरत के बीज बोए हुए थे। मैं बताना चाहता हूं कि संघ किसी के लिए अछूत नहीं है। राष्ट्र के प्रति समर्पित एक महान संगठन को बदनाम करने के लिए वर्षों से साजिश रची जा रही है। अब इस साजिश से पर्दा उठने लगा है।

Posted By: Jagran

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