महेश कुमार वैद्य, रेवाड़ी

विश्व हिदू परिषद के सहयोगी संगठन दुर्गावाहिनी से जुड़ने वाली 'दुर्गा शक्ति' को शक्ति बढ़ाने के लिए कड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। दुर्गावाहिनी का यह प्रशिक्षण वर्ग (शिविर) यहां के गांव मसानी स्थित गुरुकुलम स्कूल में आगामी नौ जून से 15 जून तक आयोजित किया जाएगा। इस राज्य स्तरीय प्रशिक्षण वर्ग में बेटियां जूडो-कराटे व दंड युद्ध जैसी कई विधाओं का प्रशिक्षण लेंगी। आरएसएस में प्रशिक्षण वर्ग नियमित प्रक्रिया है। संघ से जुड़े अधिकांश सहयोगी संगठन हर वर्ष राज्य व विभाग स्तर पर प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करते हैं। विश्व हिदू परिषद नारी शक्ति के लिए शौर्य प्रशिक्षण वर्ग का आयोजन करता है। दुर्गावाहिनी द्वारा आयोजित इस आयोजन में विहिप के ही सहयोगी संगठन मातृशक्ति भी अहम भूमिका में है। जूडो-कराटे के अलावा बहन-बेटियों को लक्ष्यभेद, नियुद्ध व बाधा दौड़ का प्रशिक्षण मिलेगा। इसके अलावा समता, खेल तथा बौद्धिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनके मायने बहुत गहरे हैं। असल में संघ व विहिप जैसे इसके सहयोगी संगठनों का पूरा जोर संस्कार व संस्कृति पर रहता है। प्रशिक्षण वर्ग में पाश्चात्य शिक्षा से पैदा हुए भौतिकवाद की जगह भारतीय संस्कारों से पैदा हुए धर्म-संस्कारों को आत्मसात करने पर बल दिया जाता है।

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यह रहेगा ड्रेस कोड:

प्रशिक्षण शिविर में ड्रेस कोड अनिवार्य होगा। पूरे प्रदेश से आने वाली बहन-बेटियां सफेद कुर्ता व सलवार, केसरिया रंग का दुपट्टा व सफेद रंग के जूते-जुराब पहनेंगी। विहिप ने वर्ग में शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भी कहा है। राज्य स्तर पर विहिप के प्रांत मंत्री ऋषि पाल शास्त्री, दुर्गा वाहिनी की प्रांत संयोजिका डॉ. इंदुराव, मातृ शक्ति की प्रांत संयोजिका डॉ. अनिता मान व दुर्गावाहिनी एवं मातृशक्ति की टीम जहां पूरे कार्यक्रम की देखरेख करेगी वहीं जिला स्तर पर विभाग संयोजिका उपासना गुप्ता, जिलाध्यक्ष रामप्रसाद, उपाध्यक्ष राजकुमार यादव व मंत्री नरेंद्र जोशी एवं उनके साथी व्यवस्था संभालेंगे।

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शौर्य प्रशिक्षण वर्ग कार्यक्रम का उद्देश्य हिदू समाज में नारी का गौरव बढ़ाना, नारी को स्वावलंबी बनाना, अबला की भावना को खत्म कर सबला बनाना, आत्मरक्षा के लिए हर तरह से प्रशिक्षित करना व सामाजिक एवं धार्मिक गुणों का विकास करना है।

-डॉ. इंदुराव, प्रांत संयोजिका, दुर्गावाहिनी

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पाश्चात्य संस्कारों ने हमारे समाज को विकृत करने का काम किया है। प्रशिक्षण वर्ग केवल आत्मरक्षा व स्वावलंबन तक ही सीमित नहीं रहते बल्कि हम समाज को संस्कारवान बनाने की दिशा में अधिक प्रयास करते हैं। जब समाज संस्कारित होगा तभी राष्ट्र भी मजबूत होगा और राष्ट्रीयता की भावना भी प्रबल होगी।

-रमेश गुप्ता, प्रांत संयोजक, विश्व हिदू परिषद

Posted By: Jagran

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