जागरण संवाददाता, रेवाड़ी:

शहर से दस अगस्त को लापता हुए राजस्थान के अलवर के मेटल व्यापारी मंगत अरोड़ा की हत्या 14 लाख रुपये की देनदारी से बचने के लिए की गई थी। रेवाड़ी के मोहल्ला संघीवाड़ा का रहने वाला व्यापारी अंकित भालिया ने हत्या कर शव को अपने गोदाम में दबा दिया था और ऊपर से पक्का फर्श भी डलवा दिया था। हत्यारोपित कई दिनों से मोहल्ला मेहरवाड़ा के रहने वाले बुआ के बेटे मनोज के साथ व्यापारी की हत्या की साजिश रच रहा था। अंकित ने हत्या में एक और युवक मोहल्ला मेहरवाड़ा के रहने वाले दीपक उर्फ दीपू को रुपयों का लालच देकर साजिश में शामिल किया था। दीपक पर पहले भी हत्या व हत्या के प्रयास की प्राथमिकी दर्ज है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को अदालत से रिमांड पर लिया है। गोदाम पर पहुंचते ही कर दी थी हत्या:

डीएसपी सिटी सुभाष चंद ने बताया कि दस अगस्त की सुबह अलवर के मेटल व्यापारी मंगत अरोड़ा शहर के मोहल्ला संघीवाड़ा के रहने वाले अंकित भालिया को स्क्रैप उपलब्ध कराते थे। अंकित की तरफ से उनके 14 लाख रुपये बकाए थे। रुपयों की देनदारी से बचने के लिए अंकित ने मंगत अरोड़ा की हत्या की साजिश रच डाली और साथ काम करने वाले बुआ के बेटे मनोज को साजिश में शामिल कर लिया। साजिश के तहत एक माह पहले ही मोहल्ला उत्तम नगर स्थित गोदाम में गहरा गड्ढा भी खोदा गया था। हत्या करने के लिए अंकित व मनोज ने मोहल्ला मेहरवाड़ा के रहने वाले दीपक उर्फ दीपू को एक लाख रुपये का लालच दिया। कर्जा होने के कारण दीपक हत्या करने के लिए तैयार हो गया। दस अगस्त को मंगत अरोड़ा रेवाड़ी आए तो अंकित ने उन्हें रुपये देने का झांसा देकर सीधे उत्तम नगर स्थित गोदाम पर भेज दिया। गोदाम पर पहले से मनोज व दीपक मौजूद थे। गोदाम में मंगत अरोड़ा के कुर्सी पर बैठते ही मनोज व दीपक ने तार से गला घोंट कर हत्या कर दी और पहले से खोदे गए गहरे गड्ढे में दबा कर ऊपर से फर्श डलवा दिया।

मोबाइल के जरिये उठा हत्या से पर्दा:

डीएसपी ने बताया कि दस अगस्त को दोपहर 12 बजे के बाद से मंगत अरोड़ा का स्वजन से कोई संपर्क नहीं हुआ तो स्वजन ने अलवर पुलिस को शिकायत दी। 12 अगस्त को अलवर से जीरो एफआइआर मिलने के बाद शहर थाना पुलिस ने अपहरण का मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। अंकित भालिया ने बताया था कि मंगत अरोड़ा उनसे 12 लाख रुपये लेकर घर चले गए थे। जांच में पुलिस ने मोबाइल ट्रेस किया तो उसकी पहली लोकेशन गांव मसानी के पास मिली। मसानी में मिली लोकेशन व अंकित द्वारा बताए गए गोदाम से निकलने के समय के बीच 45 मिनट का अंतर था। यहीं से पुलिस को अंकित पर संदेह हो गया था। इसके बाद मंगत अरोड़ा के मोबाइल की लोकेशन बिलासपुर में मिली। पुलिस ने बिलासपुर से व्यापारी का मोबाइल बरामद कर लिया। पुलिस ने मोबाइल की जांच की तो अंकित व मंगत अरोड़ा के बीच हुई बातचीत की सारी रिकार्डिंग पुलिस को मिल गई। बातचीत में मनोज नाम के युवक का भी जिक्र था। इसी दौरान अंकित भालिया शहर से गायब भी हो गया। अंकित को लुधियाना से किया काबू:

पुलिस ने पहले मनोज और फिर दीपक को हिरासत में लेकर सख्ती से पूछताछ की तो हत्या कर शव को गोदाम में दबाने के राज से पर्दा उठ गया। पुलिस ने भाग रहे अंकित की तलाश की तो उसकी लोकेशन पंजाब के लुधियाना में मिली। रेवाड़ी पुलिस की सूचना पर लुधियाना पुलिस ने अंकित को नाकाबंदी कर दबोच लिया। सोमवार की सुबह पुलिस ने एसडीएम सिद्धार्थ दहिया की मौजूदगी में मनोज व दीपक की निशानदेही पर फैक्ट्री में दबाया गया शव बरामद कर लिया और पोस्टमार्टम कराने के बाद स्वजन को सौंप दिया। शव मिलने के बाद पुलिस ने आरोपितों के विरुद्ध हत्या व साक्ष्य मिटाने का मामला भी दर्ज कर लिया है।

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हत्या के बाद लोगों से मिलता रहा अंकित:

हत्या के बाद मंगत अरोड़ा की मोटरसाइकिल व मोबाइल दीपक लेकर चला गया था। दीपक ने मोटरसाइकिल को तावडू के निकट छोड़ दिया था और मोबाइल को एक ट्रक में फेंक दिया था। हत्या के बाद मनोज व दीपक अपने घर पर रहे, जबकि अंकित लोगों से लगातार मिलता रहा। अलवर पुलिस के पहुंचने पर मंगत अरोड़ा की तलाश करते समय भी अंकित यहीं मौजूद रहा ताकि उस पर किसी को संदेह न हो। हत्या की वारदात से कुछ दिन पहले भी मंगत अरोड़ा काम के सिलसिले में मनोज व अंकित के साथ कार में गुरुग्राम गए थे। उस दिन मंगत, अंकित से दो लाख रुपये भी लेकर गए थे। डीएसपी सुभाष चंद ने बताया कि आरोपितों के विरुद्ध पुलिस ठोस साक्ष्य एकत्रित कर रही है ताकि अदालत में कठोर सजा दिलाई जा सके।

Edited By: Jagran