जागरण संवाददाता, रेवाड़ी: जिले में पिछले दिनों इंद्रदेव मेहरबान हुए हैं। आने वाले दिनों में मानसून की वर्षा और तेज होगी। मौसम खुलने के बाद जिले में अधिकांश स्थानों पर बाजरे की बिजाई आरंभ हो गई है। इससे पहले 18 जून को हुई वर्षा के दौरान कुछ किसानों ने बिजाई आरंभ कर दी थी। वर्षा का पानी मिलने से पहले से की गई बिजाई के दौरान बीज के फुटाव आने में मदद मिलेगी। इसके अलावा मुरझाई हुई कपास, सब्जियां, पेड़-पौधों में हरियाली छाई है। आने वाले 10 दिनों के दौरान किसान बाजरे की बिजाई पूरी करने की तैयारी है। वर्षा के कारण किसानों को सिचाई करने की परेशानी से राहत तो मिलेगी ही साथ ही बिजली की भी बचत होगी। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि इस वर्षा में बाजरा और दलहन की बिजाई करते हैं तो बीज जल्द अंकुरित होंगे। उन्होंने किसानों से कृषि विशेषज्ञों बीज, खाद और दवा का चयन करने की सलाह दी है।

शनिवार को साफ हुआ मौसम तो तापमान बढ़ा:

पिछले दो दिनों के दौरान जिले में गर्मी से राहत मिलने के साथ अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से नीचे चल रहा था, लेकिन शनिवार को बढ़कर अधिकतम तापमान 33 और न्यूनतम 21 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। शुक्रवार को अधिकतम तापमान 29.4 और न्यूनतम 21.2 डिग्री सेल्सियस था जबकि 30 जून को अधिकतम तापमान इससे कम 27.6 और न्यूनतम 19 डिग्री सेल्सियस था। इससे पहले 29 जून को अधिकतम 43 और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस था।

क्षेत्र के लिए बाजरे की किस्मों की सिफारिश:

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय हिसार के बावल स्थित क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र के निदेशक डा. धर्मवीर यादव के अनुसार जिले में मुख्य रूप से पानी की उपलब्धता, मिट्टी और अच्छी पैदावार के लिए बाजरे की कुछ किस्मों की सिफारिश की है। बिजाई के लिए एचएसबी और एचएचबी 299 किस्म के बाजरे की 90 से 100 दिन में पैदावार होती है। इसी प्रकार एचएचबी 197, एचएचबी 272 किस्म का बाजरा 75 से 80 दिन में पैदावार देती है। इसके अलावा 80 से 85 दिन की पैदावार के लिए एचएसबी 226 और 246 तथा 65 से 69 दिन की पैदावार के लिए एचएसबी 67 किस्म के बाजरा की सिफारिश करते हैं। इनमें कम पानी के साथ अच्छी पैदावार की उम्मीद रहती है।

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परामर्श लेकर करें बीज और खाद का चयन:

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से फसल, दलहन और तिलहन की बिजाई से पहले विशेषज्ञों से परामर्श लेने की सलाह दी है। कृषि विकास अधिकारी संगठन ने किसानों को अच्छी पैदावार के लिए उचित प्रबंधन पर ध्यान देने की सलाह दी है। खंड कृषि विकास अधिकारी डा. अजीत यादव ने कहा कि तिल, बाजरा, मूंग आदि की बुआई करने तथा खाद, बीज और दवा का चयन करने से पहले परामर्श जरूर लें। खाद, बीज और दवा खरीदते वक्त पक्का बिल जरूर लेना चाहिए। ज्यादा वर्षा से कपास में कीट और रोग लगने की संभावना रहती है, इसलिए प्रतिदिन किसानों को इनका मुआयना करना चाहिए। कपास के खेतों में पानी जमा होने नहीं देना चाहिए।

Edited By: Jagran