पानीपत, [विजय गाहल्याण]। अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर विंका पर रिश्तेदारों का शादी करने का दबाव था। विंका को उसका ओलंपिक में पदक जीतने का सपना ओझल होता दिख रहा था। ऐसे में पिता ने बेटी का साथ दिया और एक साल बॉक्सिंग खेलने की मोहलत दी। इस एक साल में शिमला मौलाना की 17 वर्षीय विंका रोड़ ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पदकों की ऐसी झड़ी लगाई कि पिता बोल उठे कि वह जब चाहे तब तक खेले। 

विंका के पिता धर्मेद्र टैक्सी चलाते हैं। बेटी का सपना पूरा करने के लिए जमीन तक बेच चुके हैं। विंका ने भी पिता को कभी निराश नहीं किया। उसने एनबीए रोहतक में जगह बनाई और अब वह 10 से 17 नवंबर तक मंगोलिया में होने वाली यूथ एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप में दम दिखाएगी। इसके लिए विंका ने मेहनत की और चार किलो वजन भी बढ़ाया। वे 60 से 64 किलोग्राम में रिंग में पदक की दावेदारी पेश करेंगी। 

बेटी ने जो वादा किया, उसे निभाया 

पिता बेटी को बॉक्सर बनाने के लिए जमीन बेच चुके धर्मेंद्र ने बताया कि बेटी विंका की शादी की अब जल्दबाजी नहीं है। बेटी ने जो वादा किया था वे निभाया। वह लगातार पदक जीत रही है। अब पिता ने रिश्तेदारों से साफ कह दिया कि बेटी जब तक चाहे बॉक्सिंग करे। वे उसे परेशान न करें। विंका ने ऐसा मुकाम हासिल कर लिया है कि लोग पिता को बेटी के नाम से जानते हैं। 

कड़े प्रयास से जीतेगी पदक : कोच  

विंका को शुरुआत में कोचिंग देने वाले शिवाजी स्टेडियम के बॉक्सिंग कोच सुनील कुमार ने बताया कि विंका ने कड़ा अभ्यास किया है। उनके पंच विरोधी पर जोरदार पड़ते हैं। इसी खूबी से वह अन्य बॉक्सरों से भिन्न है। वेट कैटेगरी बदलने के बावजूद पदक की उम्मीद है। विंका की कामयाबी सातवें नेशंस जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। खेलो इंडिया और स्कूल नेशनल बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। राज्य स्तरीय बॉक्सिंग चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण और एक रजत पदक जीता। राज्य स्तरीय खेल महाकुंभ में स्वर्ण पदक जीता।

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