जागरण संवाददाता, पानीपत : राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जिले के छह बच्चों के दिल की सर्जरी विभिन्न अस्पतालों में कराई जाएगी। इन सभी बच्चों के दिल में जन्म से छेद है। सर्जरी खर्च भुगतान के लिए सरकार ने जिला पानीपत को 7 लाख 15 हजार रुपये की धनराशि जारी की है। इनके अलावा, तीन अन्य बच्चों की सर्जरी का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया है।

डिस्ट्रक्ट अर्ली इनवेंशन सेंटर, पानीपत की नोडल अधिकारी डॉ. सुरभि गोयल ने बताया कि बच्चा जब गर्भ में रहता है उसी दौरान अल्ट्रासाउंड से शिशु के दिल में छेद का पता चल जाता है। आरबीएसके के तहत जन्मजात बीमारियों से पीड़ित बच्चों की सर्जरी नि:शुल्क कराई जाती है। इनमें दिल में छेद और कटे होठ और चिपके तालू भी शामिल हैं। दिल के छेद की सर्जरी सबसे महंगी हैं। इसमें सवा लाख से तीन लाख रुपये तक का खर्च आता है। यूं तो हर साल इस बीमारी से पीड़ित 50-60 बच्चे आते हैं लेकिन सर्जरी की जरूरत मात्र दस फीसद बच्चों को होती है, बाकी मेडिसिन से स्वस्थ हो जाते हैं। इस वर्ष 9 बच्चों की सर्जरी होनी है। इनमें से 6 बच्चे चंडीगढ़ और रोहतक पीजीआई से इलाज खर्च का अनुमानित बजट बनवाकर लाए थे। डिमांड के बाद सरकार ने इलाज खर्च की धनराशि जारी कर दी है। सभी की सर्जरी अलग-अलग अस्पतालों में जल्द कराई जाएगी।

बाकी तीनों बच्चों का प्रस्ताव भी जल्द भेजा जाएगा। डॉ. सुरभि ने बताया कि नि:शुल्क सर्जरी की सुविधा के बच्चे का नाम आंगनबाड़ी केंद्र या किसी सरकारी स्कूल में दर्ज होना चाहिए। 18 साल आयु तक के बच्चे लाभ ले सकते हैं। इन बच्चों की होगी सर्जरी :

गौरव पुत्र सुरेश

असद पुत्र प्रवीण

रियांश पुत्र सनी

ईशा पुत्री कर्मवीर

संजू पुत्र महेंद्र

रौनक पुत्र मोनू रोग के लक्षण :

-बच्चे का रंग नीला पड़ जाता है।

-नाखून और होंठ भी नीले पड़ जाते हैं।

-सांस लेने में दिक्कत होती है।

-शिशु को दूध पीने में दिक्कत आती है।

-पसीना आना, वजन कम और थकान। बच्चों के दिल में छेद का कारण :

-ज्यादातर केस जन्मजात सामने आए।

-गर्भवती महिला को रुबैला-खसरा होना।

-कुछ मेडिसन का दुष्प्रभाव।

-गर्भवती महिला द्वारा शराब का सेवन।

-गर्भावस्था के दौरान धूम्रपान, कोकीन सेवन।

Posted By: Jagran