जागरण संवाददाता, समालखा: देश को खिलौना निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने सहित इसकी इंडस्ट्री को प्रमोट करने को लेकर मंगलवार से पाईट में टायकाथोन का शुभारंभ हुआ है। विभिन्न

राज्यों के 35 टीमों ने इसमें भाग लिया। सीबीएसई के ट्रेनिग एंड स्किल एजुकेशन विभाग के निदेशक डा. विश्वजीत साहा ने मुख्यातिथि के रूप में दीप जलाकर इसकी शुरूआत की।

एआइसीटीई के चेयरमैन प्रो. अनिल सहस्त्रबुद्धे वीडियो कान्फ्रेंसिग से कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने रोजगार की जगह स्वरोजगार की राह दिखाई। डा. साहा ने कहा कि कंपनियों में काम करने वाले युवा खिलौने बना रहे हैं। अगली बार से स्कूल के छात्रों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि खिलौना इंडस्ट्री के लिए कुछ करना है तो मेहनत करनी होगी।

भारत खिलौना का बहुत बड़ा बाजार

वाइस चेयरमैन राकेश तायल ने कहा कि हमें नवाचार पर निवेश करना होगा। खुद खिलौना बनाकर बेचना और निर्यात करना होगा। हमने दुनिया को चेस व लूडो जैसे खिलौने दिए। निदेशक कुमार ने बताया कि दुनिया में चीन ही ऐसा देश है जो सबसे ज्यादा खिलौने बनाता और बेचता है। उसका मार्केट शेयर 44 प्रतिशत है। हमारे देश में 12 हजार करोड़ की खिलौना की मार्केट है, जिसमें 80 प्रतिशत दूसरे देश से आता है। कार्यक्रम में बाहर से आए प्रिसिपल को सम्मानित किया गया। मंच संचालन डा. अंजू गांधी ने किया। एआइसीटीई से सलाहकार डा. आरके सोनी, इसरो के डिप्टी जनरल मैनेजर डा. बीके भद्रा, इसरो से इंजीनियर डा. विनोद शर्मा, एआइसीटीई के असिस्टेंट इनोवेशन डायरेक्टर डा. प्रदूत कोले, पाईट के चेयरमैन हरिओम तायल, सचिव सुरेश तायल, मेंबर बीओजी शुभम तायल, निदेशक डा. शक्ति कुमार, डा. देवेंद्र प्रसाद, डीन डा.बीबी शर्मा ने भी दीप जलाने में शामिल थे। कार्यक्रम में पीआरओ ओपी रनौलिया, डा. सुनील ढुल, राजन सलूजा, राजीव ढांडा, कुलवंत, रोहित शर्मा, प्रीति दहिया, अमित दुबे, तरुण मिगलानी, डा.वैशाली, हरविदर कौर मौजूद रहे।

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