जागरण संवाददाता, समालखा

कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन है। इससे किसान पहले ही अपनी फसलों को लेकर परेशान है। वहीं ऊपर से एक बार फिर मौसम के बिगड़े मिजाज ने किसानों के माथे पर चिता की लकीर खींच दी है। उन्हें खतरा है कि एक बार फिर बारिश व ओलावृष्टि हुई तो बची फसल भी बर्बाद हो जाएगी। हालांकि सरकार ने 20 अप्रैल से फसलों की खरीद शुरु शुरु कराने की घोषणा कर दी है। किसान अजब सिंह निवासी नारायणा ने बताया कि उसने चार एकड़ में सरसों और चौदह एकड़ में गेहूं की खेती कर रखी है। सरसों की फसल पककर तैयार है। उसे कटवाएं तो मंडी में खरीद नहीं हो रही है। नहीं कटवाएं तो मौसम हर रोज बिगड़ रहा है। बारिश हुई तो फसल खेत में ही बर्बाद हो जाएगी। दूसरी तरफ गेहूं की फसल पकने जा रही है। उन्होंने कहा कि वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए लॉकडाउन सरकार का सही कदम है। किसान इसमें सहयोग कर रहे हैं, लेकिन सरकार को भी उसकी फसलों की बिक्री को लेकर कोई न कोई समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार ने 20 अप्रैल से फसलों की खरीद की घोषणा की है, लेकिन जो सरसों की फसल पक चुकी है, उसका किसान क्या करे। किसान ने सरकार से सरसों की फसल की खरीद शुरु कराने की मांग करते हुए कहा कि सरकार सरसों खरीद में ऐसी कोई प्रक्रिया अपनाएं, जिससे मंडी में ज्यादा किसान न आ पाए। ताकि लॉकडाउन पालना के साथ किसान की समस्या का भी हल निकल सके। क्योंकि किसान का जीवन खेती पर ही निर्भर है। बिगड़ रहा है मिजाज

पिछले दो दिन से कभी पूरबा तो कभी पछुआ हवा चलने के साथ आसमान में लगातार बादल छा रहे हैं। हल्की बूंदाबांदी भी हो चुकी है। ऐसे में बिगड़ता मौसम किसान के लिए नुकसान दायक साबित होगा। जबकि पहले हुई बारिश और ओलावृष्टि से ही उसकी गेहूं और सरसों फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है।

Posted By: Jagran

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