करनाल, जागरण संवाददाता। लाख प्रयास और प्रोत्साहन के बाद भी जिले में फसल अवशेष जलाने के मामले आने शुरू हो चुके हैं। विभाग की ओर से करनाल में तीन जगहों पर फसल अवशेष जलाने की सूचना भेजी गई थी। इनमें से एक लोकेशन गलत मिली, जबकि गांव रंबा और कुंजपुरा में फसल अवशेष जलाने की पुष्टि हुई है।

संबंधित किसान पर जुर्माना लगाने के साथ संबंधित पटवारी, सचिव और नंबरदार को जिला प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने फसल अवशेष जलाने पर सख्त कार्रवाई की बात कही है।

दिल्ली एनसीआर में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बीते कुछ साल से राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण ने हरियाणा समेत देशभर फसल अवशेष जलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। धान कटाई के समय फसल अवशेष जलाने के सबसे अधिक मामले सामने आते हैं। इस कारण शासन की ओर से जिला प्रशासन को फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने के साथ जुर्माना और अन्य दंड़ का प्रावधान किया गया है। इस बार फसल अवशेष जलाने पर संबंधित पटवारी, सचिव और नंबरदार को सीधे जिम्मेदार ठहराया जाएगा।

इसके बावजूद करनाल में फसल अवशेष जलाने के तीन मामले सामने आ चुके हैं। कृषि उप-निदेशक आदित्य प्रताप डबास ने बताया कि विभाग की ओर से करनाल में तीन स्थानों पर फसल अवशेष जलाने की सूचना मिली थी। इंद्री की लोकेशन गलत पाई गई। जबकि गांव रंबा और कुंजपुरा में फसल अवशेष जलाने की पुष्टि की गई है। इसपर संबंधित किसान पर जुर्माना लगाने के साथ उस क्षेत्र के पटवारी, सचिव और नंबरदार को जिला प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

फसल अवशेष का प्रबंधन करें किसान

डीडीए आदित्य प्रताप डबास ने कहा कि फसल अवशेष जलाने को लेकर इस बार शासन और प्रशासन सख्त है। जुर्माने के साथ दंडात्मक कार्रवाई का भी प्रावधान है। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से किसानों को फसल अवशेष न जलाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। उन्होंने किसानों से अपील करते हुए कहा कि किसान फसल अवशेष का कई तरीकों से प्रबंधन कर सकते हैं। जिससे उनकी आय में भी वृद्धि होगी।

इस प्रकार लगाया जाएगा जुर्माना

- दो एकड़ तक फसल अवशेष जलाने पर ढाई हजार रुपये जुर्माना

- दो से पांच एकड़ तक फसल अवशेष जलाने पर पांच हजार रुपये जुर्माना

- पांच एकड़ से अधिक क्षेत्र में फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपये जुर्माना

Edited By: Anurag Shukla

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