पानीपत/जींद, जेएनएन। सोनीपत में दो पुलिसकर्मियों की बदमाशों ने चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी। दोनों जींद के रहने वाले थे। एक कलावती का कप्‍तान तो दूसरा बूढ़ाखेड़ा गांव का लाडला रविंद्र था। दोनों की हत्‍या की सूचन जब गांव में पहुंची तो शोक की लहर दौड़ गई। 

गांव कलावती के हरियाणा पुलिस के जवान 42 वर्षीय कप्तान नेहरा को खाकी पहनने का शौक था। वर्ष 2004 में वह चौटाला सरकार में हरियाणा औद्योगिक सुरक्षा बल में भर्ती हुए थे। कांग्रेस सरकार में सुरक्षा बल के सभी जवानों को निष्कासित कर दिया था। लेकिन कप्तान का खाकी का जुनून कम नहीं हुआ और वर्ष 2017 में पुलिस में सिपाही के तौर पर भर्ती हुए। मंगलवार को बदमाशों द्वारा उनकी हत्या की खबर सुनकर पूरा गांव गमगीन हो गया। 

कलावती के ग्रामीणों ने बताया कि कप्तान का व्यवहार इतना सौम्य था कि दो लोग लड़ रहे होते तो खुद माफी मांग कर उनमें सुलह करवा देता था। पूरा गांव उनके अच्छे व्यवहार का कायल था। अब वह अपने पीछे चार फौज से रिटायर पिता, वृद्ध मां, पत्नी और एक बेटे को छोड़ गया है। चार बहनें शादीशुदा हैं। नौकरी के साथ कप्तान का परिवार तीन एकड़ की खेती भी करता था। कप्तान ङ्क्षसह के इकलौते 16 वर्षीय बेटे अंकित ने इस साल 11वीं की परीक्षा पास की है और 12वीं में हुआ है। पिता की मौत की खबर उसके मुंह से कोई शब्द नहीं निकल रहा था। मंगलवार सायं जब कप्तान का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो पूरा गांव गमगीन हो गया। भारत मां के जयकारों के साथ हजारों लोगों ने उन्हें अंतिम सेल्यूट किया। राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस टुकड़ी ने मात्मिक धुन व हवाई फायर के साथ सलामी दी। सिपाही कप्तान सिंह को सोनीपत डीएसपी वीरेन्द्र सिंह व जींद के डीएसपी जितेन्द्र सिंह ने श्रद्धांजलि दी। उसके बेटे अंकित ने मुखाग्नि दी। 

फौजी पिता तीन लड़ाइयों में शामिल रहे

मुठभेड़ में मारे गए सिपाही कप्तान सिंह के पिता जिले सिंह नेहरा 9 जाट रेजिमेंट में लांस नायक रह कर चुके हैं। उन्होंने 1965, 1971 व 1975 की पाकिस्तान के साथ लड़ाई में शामिल रहे हैं। बेटे की मौत की खबर सुनकर उनकी आंखें भीगी हुई थी। वह किसी से कुछ नहीं बोल रहे थे। ग्रामीणों में चर्चा रही कि कप्तान ङ्क्षसह के शरीर पर चाकू से करीब 18 से 19 वार किए गए हैं। 

कप्तान और रविंद्र में थी दोस्ती

कप्तान नेहरा व रविन्द्र वर्ष 2017 में पुलिस में भर्ती हुए थे। कप्तान रविंद्र बरौदा थाना के अंतर्गत आने वाली बुटाना चौकी में कार्यरत थे। ग्रामीणों के अनुसार दोनों आपस में खूब गले मिले हुए थे व एक साथ ही ड्यूटी पर आते जाते थे। एक साथ दो जवानों की मौत पर पुरे क्षेत्र में मातम पसरा हुआ है। 

सोनीपत एसपी जश्नदीप ने दी सांत्वना

बूढ़ाखेड़ा में पहुंचे सोनीपत के एसपी जश्न दीप सिंह रंधावा ने मृतक रविन्द्र के परिजनों को सांत्वना देते हुए कहा कि रविन्द्र ड्यूटी पर बहुत ही सचेत था। उसने रात्रि 12 बजे भी अपनी ड्यूटी को निभाते हुए गश्त करना ठीक समझा। मरते दम तक भी सिपाही रविन्द्र ने सूचना देने का काम किया। उसके मिले इनपुट के आधार पर पर हत्यारों को तलाश कर रही है। हत्यारे जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे। उन्होंने परिजनों को आश्वस्त किया कि पूरा पुलिस विभाग आज भी उनके साथ है व भविष्य में भी साथ रहेगा। 

बूढ़ाखेड़ा के रविंद्र ने पूरे घर की संभाल रखी थी जिम्मेदारी

गांव बूढ़ाखेड़ा में मंगलवार सुबह लोग उठे तो गांव के लाड़ले रविंद्र की हत्या की खबर सुनकर सबके चेहरे उतर गए। रविंद्र पूरे गांव का प्यारा था। ग्रामीण उसे लाड़  से निशु कहते थे। बदमाशों द्वारा हत्या की खबर सुनकर ग्रामीणों में गुस्सा भी था। शाम को जब रविंद्र का पार्थिव शरीर गांव में पहुंचा तो हजारों की संख्या में ग्रामीणों ने श्रद्धांजलि दी। 

बूढ़ाखेड़ा के ग्रामीणों की जुबां पर पूरा दिन रविंद्र उर्फ निशु का ही नाम रहा। रविंद्र की मां की बीमारी के कारण करीब 14 साल पहले ही मौत हो गई थी। तब रविंद्र की उम्र मात्र 10 साल थी। रविंद्र तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ा था। उससे छोटी एक बहन व सबसे छोटा भाई है। मां की मौत के बाद तीनों बच्चों को दादा-दादी ने बड़े लाड से पाला था। रविंद्र की छोटी बहन ने जेबीटी की पढ़ाई की हुई है। जबकि छोटे भाई अंशुल ने 12वीं के पेपर दिए हैं। ग्रामीणों ने बताया कि रविन्द्र फुटबॉल का अच्छा खिलाड़ी था। पुलिस में भर्ती होने के लिए उसने खूब मेहनत की थी। पढ़ाई के साथ सुबह-शाम खूब दौड़ लगाता था। खास बात यह है कि पुलिस में भर्ती होने के बाद वह युवाओं के बीच रोल मॉडल बन गया था। वह गांव के बच्चों को हमेशा पढऩे व खेलने की प्रेरणा देता था। रविंद्र कहता था कि पढ़ाई के साथ खेलोगे तो पुलिस व फौज का टेस्ट क्लीयर कर पाओगे। रविंद्र के पड़ोसियों ने बताया कि जब सुबह उठकर खेतों के लिए जाते थे तो रविन्द्र पढ़ता हुआ ही दिखाई देता था। पुलिस में भर्ती होने के बाद उसे कंधे पर स्टार लगवाने की इच्छा थी। इसीलिए विभागीय परीक्षा की तैयारी के लिए अब भी पढ़ाई के साथ दौड़ भी लगाता था। 

रविंद्र जिस तारीख को पुलिस में भर्ती हुआ, उसी दिन शहीद हो गया

रविंद्र ने दो साल पहले आज ही के दिन पुलिस की नौकरी ज्वाइन की थी और उसी दिन वह शहीद हो गया। छोटे भाई अंशुल ने बताया कि 30 जून 2018 को ही रविंद्र की पुलिस ज्‍वा‍इनिंग के लिए पुलिस वेरिफिकेशन हुई थी। अंशुल ने सरकार व प्रशासन से उसके भाई के दोषियों को जल्द से जल्द सजा दिलवाने की मांग करते हुए कहा कि उसके भाई को शहीद का दर्जा दिया जाए और उसके नाम से गांव में स्मारक बनाया जाए। नौकरी लगने के बाद रविंद्र ने पुराने मकान को दोबारा से बनाना शुरू कर दिया था, जो लगभग पूरा होने के कगार पर था। लेकिन सपनों के महल को वह अब नहीं देख पाएगा।

 

Posted By: Anurag Shukla

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