अंबाला, जागरण संवाददाता। नशा तस्करी में शातिरों तक पहुंचाना राजकीय रेलवे पुलिस (जीआरपी) के लिए मुश्किल हो रहा है। नशा तस्कर नशा प्लेटफार्म या फिर ट्रेन में छोड़ देते हैं। अब यह जीआरपी के हत्थे नहीं चढ़ता तो शातिर इसको उठा ले जाते हैं। बीते कई मामलों में ऐसा ही दिखाई दे रहा है। शातिर अपना काम कर चला जाता है, लेकिन जीआरपी के हत्थे नहीं चढ़ रहा। जुलाई माह में जीआरपी ने ऐसे 14 केस पकड़े हैं, लेकिन शातिर को दबोच नहीं पाई है।

नशा तस्करी के लिए तस्करों ने अंबाला कैंट रेलवे स्टेशन पर कुछ इस अंदाज में तस्करी शुरु कर दी है कि शातिर का पता लगाना जीआरपी के लिए मुश्किल हो रहा है। स्टेशन के विभिन्न प्लेटफार्मों पर शातिर नशीले पदार्थों से भरे बैग छोड़ जाते हैं ताकि दूसरे इनको मौका मिलने पर उठा लें। लेकिन जीआरपी गश्त के दौरान इन बैग को अपने कब्जे में ले लेती है।

नशीला पदार्थ तो जीआरपी बरामद कर रही है, लेकिन इनका रैकेट तोड़ने में जीआरपी को कामयाबी नहीं मिल पाई है। जुलाई माह में चौदह ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां शातिर आराम से बचकर निकल गया, जबकि नशा जीआरपी ने बरामद कर लिया। दूसरी ओर स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए हैं, लेकिन इसके बावजूद शातिर तक पहुंचने में कामयाबी नहीं मिल रही। जो नशा स्टेशन व ट्रेनों से बरामद हो रहा है, उसमें शराब की बोतलें, चूरापोस्त, गांजा आदि बरामद हुआ है।

कुछ मामले ऐसे भी सामने आए जब लावारिस बैग मिलने पर जीआरपी ने ट्रैप भी लगाया ताकि शातिर को दबोचा जा सके। लेकिन लंबा इंतजार करने पर भी कामयाबी नहीं मिली। यह वे मामले में हैं जो जीआरपी की पकड़ में आ गए हैं, लेकिन माना जा रहा है कि कई मामलों में शातिर अपने मंसूबों में कामयाब हो चुके हैं।

 

Edited By: Anurag Shukla