जागरण संवाददाता, पानीपत : गर्मी से निजात पाने के लिए युवा बेखौफ होकर नहरों में डुबकी लगा रहे हैं। कई युवाओं को तैरना भी नहीं आता था। इसी वजह से पानी में डूब कर जान भी गंवा चुके हैं। जिले में 26 दिन में नहरों व यमुना में नहाते हुए डूबने से आठ युवकों की मौत हो चुकी है। किसी ने इकलौता भाई खो दिया, तो किसी ने बेटा खो दिया।मौत के बढ़ते आंकड़े को देखकर जिला प्रशासन ने धारा 144 लगाकर नहरों व रजवाहों में नहाने पर पाबंदी लगा दी है। ये आदेश सिर्फ कागजी साबित हो रहे हैं। क्योंकि नहरों में नहाने के लिए अभी भी सुबह से लेकर शाम तक बच्चों व युवकों का मजमा लगा रहता है। गत दिनों एसपी शशांक कुमार सावन ने भी थाना प्रभारियों को आदेश दिए थे कि नहरों पर गश्त करके लोगों को नहरों पर नहाने से रोकें। पुलिसकर्मी बाइक से एक-दो चक्कर लगाकर इतिश्री कर लेते हैं। केस-एक : नहर में नहाते इकलौता बेटा डूबा

-पांच जून को सोनीपत के गढ़ी उजाले खां गांव का पवन अपने दोस्तों के साथ बुड़शाम गांव के पास नहर आया। सभी ने मिलकर शराब पी। इसके बाद युवक नहर में नहाने लगे। पवन पानी में डूब गया। दो दिन बाद पवन का शव नहर से निकाला गया। पवन अपने पिता का इकलौता बेटा था। केस-दो : नहर में युवक डूबा

तीन जुलाई को बतरा कालोनी का 19 वर्षीय अंसार बतरा कालोनी के सामने दिल्ली पैरलल नहर में रस्सी पकड़ कर नहा रहा था। रस्सी छूट गई और अंसार पानी में बह गया। दो दिन बाद अंसार का शव बिझौल के पास नहर में मिला। अंसार पांच भाइयों में सबसे छोटा था। यहां नहाते हैं युवक

युवक बतरा कालोनी के सामने, असंध रोड हनुमान मंदिर व शनि मंदिर के पास, जाटल रोड, बिझौल के पास, सिवाह और बुड़शाम के सामने नहरों में नहाते हैं। इसके अलावा नारायाणा के पास भी बच्चे व युवक नहरों में नहाते हैं। इस ओर प्रशासन का ध्यान नहीं है। यहां कभी भी हादसा हो सकता है।

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