जींद, जेएनएन। स्कूल खोलने को लेकर निजी स्कूल संचालक और प्रशासन आमने सामने हैं। निजी स्कूल जिद पर अड़े हुए हैं कि जब रैली हो रही हैं और बाकी कार्यक्रमों में भीड़ जुट रही है, तो सरकार निजी स्कूलों को पहली से आठवीं तक कक्षा लगाने की अनुमति क्यों नहीं दे रही। वीरवार को निजी स्कूल संचालक प्रदर्शन करते हुए लघु सचिवालय में डीसी से मिलेंगे और अपनी स्कूल बसों की चाबियां उन्हें सौपेंगे।

प्रदेश सरकार ने बढ़ते कोरोना वायरस को देखते हुए पहली से आठवीं तक स्कूल बंद करने का फैसला लिया है। अगर जींद जिले की बात करें, तो अप्रैल में कोरोना काफी तेजी से फैला है। पहले जहां प्रतिदिन औसतन 15 से 20 30, फिर 40 से 50 केस कोरोना के मिल रहे थे। अब 100 से ज्यादा केस प्रतिदिन मिल रहे हैं। बुधवार को जिले में 271 लोगों की करुणा रिपोर्ट पॉजिटिव आई। वहीं विद्यार्थियों की ही बात करें, तो स्कूल और कॉलेजों में 120 से ज्यादा विद्यार्थी कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। जिसके कारण प्रशासन व सरकार की चिंताएं बढ़ी हुई हैं। निजी स्कूल कोरोना टेस्ट भी विद्यार्थियों के नहीं करवा रहे हैं। जिसके चलते भी परेशानी बढ़ सकती है। क्योंकि स्कूलों में कोरोना फैला तो स्थिति ज्यादा गंभीर हो सकती है।

सरकार के आदेश नहीं मानने वाले स्कूलों के खिलाफ प्रशासन और शिक्षा विभाग भी शक्ति दिखाने के मूड में है जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी वीरवार को खुद फील्ड में उतरकर स्कूलों का निरीक्षण करेंगे। उन्होंने कहा है कि अगर कोई स्कूल पहली से आठवीं कक्षा तक खुला मिलता है, तो उस स्कूल संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। वहीं दूसरी तरफ ज्यादातर निजी स्कूलों ने वीरवार को स्कूल बंद करके बसों के साथ लघु सचिवालय पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराने का प्लान है। जहां डीसी से मिलकर निजी स्कूल संचालक बस और स्कूलों की चाबी उन्हें सौपेंगे।

जिले में लगभग 450 स्कूल हैं। निजी स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। काफी बच्चे दाखिले ले चुके हैं। निजी स्कूल का कहना है कि कोरोना की वजह से पिछला साल बच्चों का खराब हो गया था। जिससे वे ढंग से पढ़ नहीं पाए थे। अगर अब स्कूलों को बंद कर दिया गया, तो यह साल भी पूरा खराब चला जाएगा। स्कूल संचालकों को अंदेशा है कि स्कूल बंद होने की स्थिति में दाखिला और भी नहीं आएगी। जिससे उनके लिए स्टाफ को वेतन देने और स्कूल चलाने में मुश्किल हो सकती है।

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