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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 26, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

राजा नारायण ने 182 साल पहले स्थापित किया था शिव मंदिर, दूर-दूर से आते हैं शिवभक्‍त

By Anurag ShuklaEdited By:
Published: Tue, 26 Jul 2022 07:37 AM (IST)

Sawan Shivratri अंबाला के नारायणगढ़ में राजा नारायण ने 182 साल पहले शिवलिंग स्‍थापित किया था। मंदिर के साथ में ...और पढ़ें

Sawan Shivratri 2022: अंबाला के नारायणगढ़ स्थित राजाओं वाला तालाब के पास 182 साल पुराना शिव मंदिर।
Sawan Shivratri 2022: अंबाला के नारायणगढ़ स्थित राजाओं वाला तालाब के पास 182 साल पुराना शिव मंदिर।

पानीपत/नारायणगढ़ (अंबाला), [चंदेश चोपड़ा]। Sawan Shivratri 2022: नारायणगढ़ का ऐतिहासिक धरोहर राजाओं वाला तालाब व शिव मंदिर में आज भी दूर-दर से लोग आते हैं। करीब 182 साल पहले राजा नारायण ने मंदिर व किला बनाया था। इसके साथ ही एक तालाब भी बनाया गया। मंदिर में आज भी श्रद्धालु पूजा अर्चना के लिए आते हैं, जबकि तालाब सूख चुका है और किला खंडहर हो रहा है। यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही है।

हिमाचल के नाहन रियासत की देन है राजा वाला तालाब व किला

कभी नाहन हिमाचल के राजा नारायण की रियासत नारायणगढ़ तक होती थी। नारायणगढ़ को बसाने वाला राजा नारायण ही था। जब नारायणपुर के नाम से गांव था। इस का सबूत बोलता नारायणगढ़ में एक किला व राजावाला तालाब। किले के एक ओर जहां पुलिस थाना है, वहीं दूसरी ओर सीआइए स्टाफ का कार्यालय है। यह राजा का किला हुआ करता था। इस समय किले की भी हालत खस्ता होती जा रही है । किले में बने पुलिस थाना फिर भी पुलिस प्रशासन द्वारा उसकी देखरेख कर उसका निर्माण किया गया ।

पानी से भरा रहता था तालाब, आज सूख चुका

राजावाला तालाब कभी लबालब पानी से भरा रहता था। इसमें दो घाट होते थे। एक घाट पर जहां आमजन व नगरवासी पानी पीते थे और मवेशियों को पानी पिलाते थे। इस तालाब में दो कुएं थे, जिनसे पानी इस तालाब में आता था। राजस्व के लिए अलग से एक घाट था। सत्ता बदली तो राज करने वाले भी बदल गए। आज हालत यह है कि तालाब सूख चुके हैं।

शिव मंदिर का निर्माण 1840 में हुआ था

शिव मंदिर में रहने वाले महंत त्रिलोकी नंद गिरी ने बताया कि नाहन के राजा द्वारा राजावाला तालाब के पास शिव मंदिर का निर्माण 5 जुलाई 1840 में किया गया था। जहां पर रानी पहले तलाब में स्नान कर के शिव की पूजा आदि करती थीं। शिव मंदिर के चारों तरफ छायादार पेड़ लगे हुए होते थे। यही पर धर्मप्रेमी व राहगीर पूजापाठ व विश्राम किया करते थे। यह मंदिर की आज ट्रस्ट द्वारा देखरेख की जा रही है। शिव मंदिर में राजाओ के समय का पुरान शिवलिंग बाहर स्थापित है जबकि नया शिवलिंग बाद में स्थापित किया गया। इस मंदिर में लोग दूरदराज क्षेत्रों से पूजा अर्चना करने के लिए आते हैं।

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