कैथल (पूंडरी), संवाद सहयोगी। कैथल के पूंडरी में स्थापित प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर महाभारत कालीन है। सावन माह में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। इस दौरान शिवभक्त देर शाम तक मंदिर में जलाभिषेक करने पहुंचते हैं। मंदिर में सुबह चार से लेकर 10 बजे तक काफी अधिक भीड़ लगती है। इसका इतिहास पूंडरीक तीर्थ से जुड़ा है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस शिव मंदिर की स्थापना महाभारत में मारे गए सैनिकों की आत्मिक शांति के लिए की गई थी।

मंदिर की देखरेख सभा बनाकर की जा रही है। सभा के सेवादार बजरंग नागरथ ने बताया कि भारत-पाक विभाजन के समय जब वे पूंडरी आए थे तो तब भी यहां ग्यारह रूद्री मंदिर था। समय-समय पर सभा द्वारा यहां निर्माण कार्य करवाकर इसे विस्तार दिया जाता रहा। उन्होंने बताया कि इन दिनों मंदिर में लंगर हाल का निमरण करवाया जा रहा है।

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सभा के सेवादार बजरंग नागरथ।

शिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर में विशेष तैयारियां की जा रही है। मंदिर के पुजारी संदीप आत्रेय ने बताया कि यहां भगवान भोले नाथ ग्यारह रूद्र यानि ग्यारह लिंगों में विराजमान है, इसलिए इस मंदिर की आस्था दूर-दूर तक फैली हुई है। सावन और फाल्गुन की शिवरात्रि भक्त हरिद्वार से गंगा जल लाकर भोले बाबा को चढ़ाते है और अपनी मन्नतें पूरी करते है। उन्होंने बताया कि मंदिर को हर बार की तरह विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर के पुजारी संदीप शास्त्री का कहना है कि सोमवार को विधि विधान से की गई पूजा अर्चना से भोले बाबा से मन चाहे फल की प्रापि्त होती है और इस सावन माह में शिवलिंग पर गंगा जल चढ़ाने से व्यक्ति का जीवन सफल हो जाता है। मंदिर सभा के कतर-धतर बजरंग नागरथ ने कहा कि यहां हर महीने में एक बार त्रयोदशी के दिन भंडारे का आयोजन किया जाता है।

वर्तमान में यह है मंदिर की स्थिति

पूंडरी के प्राचीन श्री ग्यारह रुद्री शिव मंदिर को भव्य रुप दिया गया है। यहां पर मंदिर परिसर में शिवालय के साथ मां दुर्गा, भगवान हनुमान और श्री राम दरबार भी स्थापित किया गया है। यहां पर एक लंगर हाल और एक सत्संग हाल बना है।

Edited By: Anurag Shukla