कैथल, जेएनएन। कलायत क्षेत्र के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) दो डाक्टरों के सहारे चल रही है। इसके तहत कलायत, बालू, देबवन और बात्ता पीएचसी कार्यरत हैं। कोरोना संकट के मद्देनजर हर किसी की उम्मीदें मुख्य रूप से स्वास्थ्य विभाग पर ठहरी हैं। जिले के कलायत क्षेत्र में 1 लाख 74 हजार 259 लोगों की सेहत की जिम्मेवारी महज दो डाक्टरों के कंधों पर है।

प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग द्वारा कलायत सीएचसी में एक एसएमओ सहित डाक्टरों के सात पद स्वीकृत हैं। इसी तरह सीएचसी के तहत आने वाली बालू, बात्ता और देबन पीएचसी में दो-दो चिकित्सा अधिकारियों का प्रावधान है। सीएचसी और पीएचसी के इन सभी 13 डाक्टरों में से वर्तमान में केवल 5 डाक्टरों के पद भरे हैं। इनमें से तीन डाक्टर कैथल में प्रति नियुक्ति पर कार्यरत बताए जाते हैं। इस मायने से केवल डा. प्रगति सिंह और डा. .कुलदीप सिंह के कंधों पर इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं का जिम्मा है।

डाक्टरों के साथ-साथ अन्य पदों की रिक्तियों की फेहरिस्त भी लंबी है। ऐसे में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की मांग हर तरफ से उठ रही है। कोरोना संकट के चलते यह मांग ज्यादा बल पकड़ रही है। साथ ही राजनेताओं, प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को इस दिशा में प्रभावी प्रयास करने की जरूरत है। हालांकि प्रदेश मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने प्रथम कार्यकाल में कलायत में आधुनिक सुविधाओं से सु-सज्जित अस्पताल निर्माण की जो घोषणा की थी उसका निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। वर्तमान में जिस पुराने अस्पताल से सेवाएं दी जा रही है वह खुद बदहाली का शिकार है। डीसी ने लोक निर्माण विभाग को गतिशीलता से कार्य निपटाते हुए भवन स्वास्थ्य विभाग को हैंड आवर करने के निर्देश आठ मई के कलायत दौरे के दौरान दिए।

दोहरी जंग लड़ रहा स्वास्थ्य विभाग:

कलायत सरकारी अस्पताल में डा.प्रगति सिंह और डा. कुलदीप सिंह स्थायी रूप से कार्यरत हैं। वैश्विक कोरोना के खिलाफ जंग लड़ने के साथ-साथ स्वास्थ्य अधिकारी स्टाफ के साथ लोगों की सेहत की जिम्मेवारी संभाले हैं। कलायत अस्पताल में एलटी के तीन पदों में से 2 कार्यरत हैं। फार्मेसिस्ट के तीन पदों में से 2 पद रिक्त हैं। इसी तरह चतुर्थ श्रेणी के नियमित कर्मियों की भी अस्पताल को दरकार है। अस्पताल में प्रतिदिन अनुमानित 200 से 250 रोगी आते हैं। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदीप रापडिय़ा आम जन की सेहत की वकालत कर रहे हैं। रापडिय़ा की पैरवी से सरकार में हलचल है। सरकार ने रिक्तियों को भरने का सिलसिला शुरू कर रखा है। इसके तहत अस्पतालों में स्थायी रिक्तियोंं की प्रक्रिया से पहले वैकल्पिक व्यवस्था अस्पतालों में की जा रही है।