अंबाला, जागरण संवाददाता। पसियाला गांव वासी लख्मी चंद उत्तर रेलवे का कर्मचारी था। रविवार को घर पर हवन हुआ और सायं अपने चचेरे भाई के साथ राख मारकंडा नदी में डालने के लिए निकला। वापस लौटते समय पसियाला व सबगा गांव के बीच पुलिया पर सबगा वासी सतवंत सिंह ने रोकते हुए शराब के लिए रुपये मांगे। जब लख्मी ने रुपये न होने की बात करते हुए देने से मना कर दिया तो वह खुद को पसियाला गांव का बाप कहते हुए पैंट की जेब से चाकू निकाला और छाती में घोंप दिया। अभी लख्मी का चचेरा भाई प्रदीप उसे पकड़ता वह मौका देख भाग गया। आसपास के लोगों की मदद से घायल लख्मी चंद्र को नागरिक अस्पताल लाते समय रास्ते में ही मौत हो गई।

दो की छुट्टी पर था लख्मी

उत्तर रेलवे में सिग्नल लाइटों की मरम्मत करने वाला लख्मी घर पर धार्मिक कार्यक्रम को लेकर आफिस से दो दिन की छुट्टी लिया था। रविवार को घर से हवन की राख लेकर नदी में डालने के निकले लख्मी ने घटना से 10 मिनट पहले ही फोन पर बात करके रात को बनने वाले खाने की तैयारियों को लेकर परिवार से चर्चा की थी। घर से यह भी कहा गया था कि वापस लौटते समय कुछ जरुरी सामान भी लेकर आना।

छिन गया मां का आंखों का तारा

मां देव कौर (60) को रात लोगों ने बेटे को अस्पताल में दाखिल कराने की बात बताई। जब सुबह वह अपने बेटे को देखने के लिए अस्पताल जाने की बात कही तो लोगों ने कहा कि अभी दोपहर तक अस्पताल से छुट्टी हो जाएगी। अचानक जब दोपहर उसके बेटे लख्मी का सफेद कपड़े में लिपटा शव दरवाजे पर पहुंचा तो वह फूटफूटकर रोने लगी।

परिवार का रो-रोकर बुराहाल

पसियाला में माहौल उस समय गमगीन हो गया जब लख्मी का शव लेकर गांव में एंबूलेंस पहुंचा। पत्नी, बेटा कौशल, श्रीश सहित पूरे परिवार का रो-रोकर बुराहाल है। सभी के जुबान पर यही था कि कातिल को सख्त से सख्त सजा दी जाए। पुलिस की मौजूदगी में शव का अंतिम संस्कार हुआ।

गोद में ही लख्मी ने तोड़ा दम

प्रदीप बताते हैं कि जब वह गांव के जिले सिंह के साथ गाड़ी में खून से लतफत लख्मी को अस्पताल लेकर जा रहा था तो एकदम से खौफ का माहौल था। हमारे भी भीतर यही बात आ रही थी कि काश हम कातिल को रुपये दे देता तो शायद यह घटना न होती। अभी गांव से करीब 10 किलो मीटर ही गाड़ी चली थी कि लख्मी ने गोद में ही दम तोड़ दिया था।

Edited By: Anurag Shukla

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