कैथल, [पंकज आत्रेय]। भूतपूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम कहते थे, सपना वो नहीं जो आप नींद में देखें। सपना वो है, जो आपको नींद ही न आने दे। हरियाणा के मनोज गेरा ने ऐसा ही सपना देखा और आखिरकार उसे पूरा भी किया। वायुसेना के ग्रुप कैप्‍टन मनोज गेरा ने आसमान में उड़ने का पिता का सपना साकार किया। उनके पिता बेटे की उपलब्धि को खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं।

गेरा की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है। एक व्यवसायी मुरारी लाल गेरा के बड़े बेेटे मनोज गेरा जब स्कूल में पढ़ते थे, तभी से फाइटर प्लेन उड़ाने की सोचते थे। दरअसल, उनके पिता एयरफोर्स में जाना चाहते थे। पिता जब प्लेन के बारे में बताते तो मनोज के मन में भी रोमांच भर उठता। साल 1997 में स्थानीय ओएसडीएवी पब्लिक स्कूल से 12वीं की परीक्षा पास की और रादौर के जेएमआइटी इंस्टीट्यूट में इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया। कंप्यूटर इंजीनियरिंग की पढ़ाई करते हुए भी मनोज के दिमाग में एयरफोर्स ही थी।

इंजीनियरिंग में एडमिशन से पहले एनडीए की परीक्षा दी हुई थी। उनको यकीन था कि पास हो जाएंगे और हुआ भी यही। चयन होते ही इंजीनियरिंग को छोड़ने में एक पल भी नहीं लगाया। वर्ष 1998 में एयरफोर्स ज्वाइन की और वर्ष 2002 में कमीशन हासिल की। मनोज को पहली पोस्टिंग असम के तेजपुर में मिली। इसके बाद उन्होंने पुणे, बरेली व सिरसा एयरफोर्स स्टेशन में अपनी सेवाएं दीं।

फोन पर जागरण से बातचीत में ग्रुप कैप्टन मनोज गेरा ने कहा कि उन्हें हरियाणा का बेटा होने पर गर्व है। देश के लिए डिफेंस में सेवा करना पिता का सपना था।  पिता मुरारी लाल गेरा का कहना है उनका सपना था कि उनका बड़ा बेटा सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करे। मनोज मेरा सपना पूरा कर रहा है। एक पिता के लिए इससे गौरव की बात और क्या हो सकती है। उसमें में यह जज्बा बचपन से ही भरा था। साइंस संकाय में पढ़ाई के बावजूद उसने एनडीए किया और एयरफोर्स के लिए चुना गया।   

Posted By: Sunil Kumar Jha

डाउनलोड करें जागरण एप और न्यूज़ जगत की सभी खबरों के साथ पायें जॉब अलर्ट, जोक्स, शायरी, रेडियो और अन्य सर्विस