जागरण संवाददाता, पानीपत : आज राष्ट्रीय हिदी दिवस है। जिस तरह राष्ट्र और समाज के निर्माण में हमेशा ही नारी शक्ति की अहम भूमिका रही है, ऐसे ही एक नारी हिदी को आगे बढ़ाने व सम्मान दिलाने के लिए काम कर रही हैं। नाम हैं दुर्गा। हाल में समालखा के भापरा स्थित माडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हिदी की प्राध्यापिका के पद पर तैनात है।

स्कूल के बाद घर पर हिदी प्रेम से जुड़ी कविताएं व लेख लिखकर न केवल इंटरनेट मीडिया के जरिये लोगों तक पहुंचा रही हैं, आम लोगों को ज्यादा से ज्यादा हिदी लिखने व बोलने के प्रति प्रेरित करती हैं। विद्यार्थियों को भी हिदी का महत्व बताती हैं। उनके बीच हिदी कविताओं की अंताक्षरी प्रतियोगिता कराती हैं।

प्राध्यापिका दुर्गा कहती हैं कि भाषा आपसी विचारों के संप्रेषण का सशक्त माध्यम हैं। हम जिस मिट्टी में जन्म लेते हैं, वो हमारी मातृ व जन्मभूमि कहलाती है। उसी तरह बच्चा पैदा होने के बाद सबसे पहले जिस भाषा को अपनी अभिव्यक्ति देता है, वहीं उसकी मातृभाषा कहलाती है। हमारी मातृभाषा हिदी है। लेकिन आज बड़ा दुख होता है जब अभिभावक बच्चे के बोलना सीखते ही हिदी की बजाय अंग्रेजी बोलने पर ज्यादा जोर देते हैं। हमें अपनी मातृभाषा को आगे बढ़ाना चाहिए।

प्राध्यापिका ने कहा कि संविधान के अनुरूप 343 वें अनुच्छेद के अनुसार हिदी को राजभाषा का दर्जा दिया गया है, लेकिन ये केवल कागजों तक सिमटकर रह गया है। हम अंग्रेजी में पत्र व्यवहार व कार्यालयों में काम करना अपनी शान समझते हैं। ये विदेशी भाषा का सम्मान और अपनी का अपमान क्यों। प्राध्यापिका का कहना है कि हमें 14 सितंबर को एक दिन हिदी का सम्मान करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि अपनी मातृभाषा हिदी की महत्ता व गौरव बढ़ाने का लगातार प्रयास करना चाहिए।

पिछले कई सालों से हिदी में हिदी के सम्मान में कविताएं लिख इंटरनेट मीडिया पर डाल लोगों को इसके प्रति जागरूक करती आ रही हैं। कई बार कार्यक्रम भी आयोजित कर चुकी हैं। स्कूल में बच्चों के बीच भी समय समय पर हिदी के प्रति रूझान को लेकर प्रतियोगिता कराती हैं। राष्ट्रीय हिदी दिवस के उपलक्ष्य में लिखी कविता

सुनो-सुनो तुम भारतवासी,

भाषा बोलते सब न्यारी-न्यारी।

रंग-बिरंगे फूलों जैसी,

खिलती है हर क्यारी-क्यारी। कोई बंगाली, कोई गुजराती,

कोई मलयालम, सिधी बोले।

सब भाषाओं मे उत्तम लगती,

जो भी भाषा हिदी बोले। अंग्रेजी से बढ़कर अपनी भाषा,

हिदी लगती मुझको प्यारी है।

क्योंकि हिदी भाषा तो,

दुनिया में सबसे न्यारी है। हम सबकी बनती जिम्मेदारी है,

हिदी को राष्ट्र भाषा बनाना है।

हिदी की खोई साख को,

फिर वापिस बनाना है। यही भारत की जान हिदी है,

यही भारत की शान हिदी है।

मुझे गर्व है अपनी भाषा पर,

मेरा अभिमान हिदी है हिदी हमारे देश की पहचान

आइबी कालेज की सहायक प्रोफेसर डा. रंजू का कहना है कि हिदी भाषा हमारे देश की पहचान है। साथ ही यह हमारी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति की भी परिचायक है। हिदी ही एक ऐसी भाषा है जिसे अन्य भाषाओं की अपेक्षा समझना काफी आसान है। अब तो विदेशों में भी लोग हिदी बोलने और समझने लगे हैं। हिदी दिवस के मौके पर विशेष रूप से हमें इस बात का प्रण लेना चाहिए कि हम अपनी आम बोलचाल और कामकाज की भाषा में हिदी का ही प्रयोग करेंगे।

Edited By: Jagran