कैथल, जागरण संवाददाता। धान का सीजन शुरू होते ही एयर क्वालिटी इंडेक्स यानि वायु में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है। आठ अक्टूबर को इंडेक्स 124 था और 14 अक्टूबर को इंडेक्स 140 पर पहुंच गया। हालांकि इस दौरान इंडेक्स का स्तर 150 से ऊपर भी पहुंच चुका है। जिले भर में धान के अवशेषों में आगजनी के मामले सामने आ रहे हैं। वाहनों की आवाजाही बढ़ने के कारण सड़कों पर धूल उड़ती है, जिस कारण प्रदूषण बढ़ जाता है। कृषि विभाग की तरफ से आगजनी के 41 मामलों में किसानों को 70 हजार रुपये जुर्माना किया जा चुका है। आगजनी के कारण लोगों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।

शाम होते ही आंखों में जलन शुरू हो जाती है। अगर बाइक पर सफर कर रहे हों तो आंखों में पानी आने लगता है। बढ़ते प्रदूषण से सांस लेने में तकलीफ और ह्दय से संबंधित रोग बढ़ जाते हैं। हालांकि जिला प्रशासन की तरफ से फसल अवशेषों में आग न लगाने को लेकर किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है। उसके बाद भी आग लगाने के मामले कम नहीं हो रहे हैं।

इस तरह से बढ़ा प्रदूषण का स्तर

तारीख प्रदूषण का स्तर

आठ अक्टूबर 124

नौ अक्टूबर 156

10 अक्टूबर 150

11 अक्टूबर 145

12 अक्टूबर 149

13 अक्टूबर 154

14 अक्टूबर 140

इस तरह जानें प्रदूषण का स्तर

एयर क्वालिटी इंडेक्स 0 से 50 तक अच्छा, 51 से 100 तक सामान्य, 101 से 200 तक खतरनाक और सांस के रोगियों के लिए नुकसानदायक, 201 से 300 तक खराब। 301 से 400 तक बहुत ज्यादा खराब। हालांकि इंडेक्स का स्तर हर घंटे कम या ज्यादा होता रहता है।

ये हैं प्रदूषण के स्तर को बढ़ने से रोकने के उपाय

- अगर कहीं धूल उड़ रही हो तो वहां पानी का छिड़काव किया जाना चाहिए।

- हमारे आस-पास अगर कहीं कचरे में आग लगी हो तो तुरंत उसको बुझा देना चाहिए।

- निर्माण कार्य की सामग्री को ढक कर रखना चाहिए।

- फसल अवशेषों में आग बिल्कुल नहीं लगानी चाहिए।

- आस-पास के पौधों पर पानी का छिड़काव करना चाहिए ताकि उन पर जमी धूल साफ हो सके।

हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल आफिसर राजेंद्र शर्मा ने बताया कि कुछ दिनों से एयर क्वालिटी इंडेक्स बढ़ रहा है। उनकी किसानों से अपील है कि फसल अवशेषों में आग न लगाएं। शहर के लोग भी कचरे के ढेरों में आग न लगाएं।

Edited By: Anurag Shukla