जागरण संवाददाता, पानीपत

आपका एकाएक शुगर लेवल बढ़ा है तो इसका कारण बढ़ता प्रदूषण भी हो सकता है। प्रदूषण से एंड्रोक्राइन सिस्टम, पैंक्रियाज से उत्सर्जित इंसुलिन की प्रक्रिया बिगड़ रही है। सूक्ष्म कण पीएम 2.5 रक्त नलिकाओं में पहुंचकर रक्तचाप, बीएमआइ, स्ट्रोक बढ़ा रहे हैं। थायराइड ग्रंथि भी प्रभावित हो रही हैं।

मधुमेह और हार्मोन विशेषज्ञ डॉ. पावन वधावन ने इंडियन मेडिकल रिसर्च काउंसिल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि नाइट्रोजन डाईआक्साइड, पीएम 2.5 व पीएम 10 बीएमआइ-बॉडी मॉस इंडेक्स को बढ़ाती हैं। क्रोमियम, कैडमियम, पारा, शीशा आदि एंडोक्राइन सिस्टम (अंत:स्त्रावी तंत्र) को बिगाड़ते हैं। इससे मोटापा, शुगर, मोटापा और कैंसर हो सकता है। उन्होंने बताया कि टाइप-2 शुगर बढ़ने के पीछे प्रदूषण को भी अहम फैक्टर माना जा रहा है। विटामिन-डी इंसुलिन को रेगुलेट करने के साथ ब्लड शुगर भी नियंत्रित करता है। स्मॉग के दौरान धूप नहीं निकलने से पर्याप्त मात्रा में विटामिन-डी नहीं मिलती।

डॉ. पावन के मुताबिक हवा में प्रदूषण के बीच बाहर टहलने के बजाय घर में रहकर प्राणायाम, कपालभाति, अनुलोम-विलोम और सूर्य नमस्कार करें। शुगर लेवल बढ़ा है तो चिकित्सक से सलाह अवश्य लें। अस्पतालों में सांस के रोगी बढ़े

सिविल अस्पताल सहित शहर के बड़े प्राइवेट अस्पतालों में स्मॉग के चलते फिजिशियन, मेडिसिन ओपीडी में करीब 20 फीसद की वृद्धि हुई है। सिविल अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में 100 से अधिक नए मरीज पहुंचे। पंद्रह दिनों में प्रत्येक अस्पताल में दमा, सीओपीडी (क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) पांच से 10 मरीजों को भर्ती होना पड़ा है। इनहेलर लेने की संख्या भी बढ़ी है।

Posted By: Jagran

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