पानीपत/करनाल, [पवन शर्मा]। जब पूरे देश में सीएए की मुखालफत का शोर गूंज रहा हो तो व्हील चेयर पर बैठे इस बच्चे के सुरों में सच्चे 'हिंदुस्‍तान की आवाज' सुनकर यकीनन दिल को अलग ही सुकून मिलता है। करनाल के बाल भवन में रह रहे होनहार नकीम का हौसला काबिल-ए-तारीफ है कि हवा का रुख चाहे जिस तरफ हो, उसके होठों पर 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारां' के बोल सजे हैं। अब वह भारतीय स्वाधीनता संग्राम में अंग्रेजों के विरोध का प्रतीक रहे इसी तराने की पेशकश गणतंत्र दिवस समारोह में देगा, जब हरियाणा के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला और अन्य हस्तियां इस अनूठे पल की साक्षी बनेंगी।

'तराना-ए-हिंदी' 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारां' के बोल अब नन्हे होनहार नकीम के दिल की आवाज बन चुके हैं। करनाल के बाल भवन चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट में रहकर अपना हुनर तराश रहे इसी बच्चे की अगुवाई में संस्थान के करीब 35 बच्चे करनाल में मुख्य गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान आजादी के तराना 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्ता हमारां' पेश करेंगे। इससे उत्साहित नकीम ने जागरण को बताया कि वह कक्षा सात में पढ़ता है। छोटी उम्र से ही उसे गाने का शौक है। अरिजित सिंह उसके पसंदीदा बॉलीवुड गायक हैं तो एआर रहमान के संगीत से सजा गीत 'जय हो' भी वह बड़े दिल से गाता है। नकीम बहुत अच्छा डांस भी करता है तो स्टंट में भी उसे महारत हासिल है। नकीम के रूम पार्टनर नितिन ने बताया कि नकीम की सबसे बड़ी खूबी यह है कि उसमें गजब का आत्मविश्वास है। दैनिक कार्यों से लेकर कहीं आने-जाने तक में नकीम किसी की मदद कम ही लेता है।

नकीम के हुनर से रोशन होगा नाम 

बाल भवन के पास ही एक स्कूल में पढऩे वाले नकीम की दिलीतमन्ना है कि वह संगीत और गायन में ही अपनी प्रतिभा तराशे। इसमें उसे बाल भवन के जिम्मेदार पूरा सहयोग कर रहे हैं। बाल भवन के हाउस कीपर अश्वनी बताते हैं कि बहुमुखी प्रतिभा के धनी नकीम से उन्हें तमाम उम्मीदें हैं। देशप्रेम की भावना उसके रोम-रोम में समाई है। वह निराश्रित जरूर है लेकिन बाल भवन के तमाम छात्र-छात्राओं में उसे पूरा परिवार नजर आता है। उन्हें यकीन है कि उचित संरक्षण व मार्गदर्शन मिले तो नकीम एक न एक दिन न केवल बाल भवन बल्कि पूरे हरियाणा का नाम रोशन करेगा।  

रोहतक से लाया गया था करनाल 

बाल भवन चाइल्ड केयर इंस्टीट्यूट के संचालक पीआर नाथ बताते हैं कि नकीम करीब पांच वर्ष पहले रोहतक बाल भवन से यहां आया था। संस्थान के अन्य बच्चों की तरह वह भी निराश्रित है। इस बच्चे में देशप्रेम की भावना कूट-कूटकर भरी है। इसीलिए वह एकता और सौहार्द का संदेश देने वाले गीत गाना पसंद करता है। उसे संस्थान के अन्य बच्चों की तरह तमाम सुविधाएं दी जाती हैं। वार्षिक भ्रमण कार्यक्रम में उसे जब वाघा बॉर्डर ले जाया गया था तो वहां उसने पूरे जोश से 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' के नारे लगाए। 

Posted By: Anurag Shukla

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