जागरण संवाददाता, पानीपत :

असंध विधानसभा सीट पर कर्मचंद पूनम ने कांग्रेस के टिकट पर वर्ष 1987 और 1991 चुनाव लड़ा। दोनों बार पराजय झेलनी पड़ी। वर्ष 2000 में पत्नी राजरानी पूनम को मैदान में उतारा, हार गईं। वर्ष 2005 में फिर चुनाव लड़ा और कृष्णलाल पंवार को करारी शिकस्त दी। पंवार को दोबारा पटखनी देने के इरादे से पार्टी हाईकमान से टिकट मांगा था। पार्टी ने बलबीर वाल्मिकी पर भरोसा जताया, इससे राजरानी पूनम नाखुश हैं।

मॉडल टाउन स्थित आवास पर हुई बातचीत के दौरान पूर्व विधायक के चेहरे पर निराशा के भाव आते-जाते रहे। उन्होंने बताया कि कांग्रेस ने बहुत से उतार-चढ़ाव झेले। उनके परिवार ने भी बहुत कुछ सहा, लेकिन कभी कांग्रेस छोड़ने की बात मन में नहीं आई। कांग्रेस के टिकट पर पति कर्मचंद पूनम दो चुनाव हार चुके थे। 1994 में उन्होंने जिला परिषद का चुनाव जीता तो पति को भी सुकून मिला। वर्ष 2000 में विधानसभा चुनाव लड़ा और हार गई। 2005 में चुनाव जीत गई। इस बार उम्मीद थी कि पार्टी महिलाओं को सम्मान देते हुए टिकट देगी, लेकिन नहीं मिला। दो बड़ी पार्टियां महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण की बात तो करती हैं, खरी नहीं उतरती। हरियाणा की 90 सीटों में से कांग्रेस ने मात्र 9 और भाजपा ने 12 महिलाओं को टिकट दिए हैं।

चुनावी माहौल में दिनचर्या पर सवाल किया तो राजरानी पूनम ने कहा कि टिकट न मिलने से निराशा हैं। चुनाव उसे लड़ाया जाता है जो इस लायक हो। पानीपत शहर, ग्रामीण, इसराना और समालखा सीट पर चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों ने उनसे संपर्क नहीं साधा है। दूसरे जिलों में कुछ परिचित चुनाव लड़ रहे हैं, उनकी मदद कर रही हैं। जिले की मतदाता इस बार ज्यादा से ज्यादा वोट डालें। लोकतंत्र की यही पहचान है।

Posted By: Jagran

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