पानीपत, [विजय गाहल्याण]। राजनगर का 15 वर्षीय सागर जागलान उर्फ कट्टर बचपन में गुस्सैल था। दोस्तों की पिटाई कर देता था। इसी वजह से दोस्त उसके साथ खेलना पसंद नहीं करते थे। इस रवैये से परिजन परेशान हो चुके थे। उन्हें चिंता थी कि यही हालात रहे तो वे अप्रिय घटना भी कर सकता है। इसलिए छह साल पहले उसे सोनीपत के रोहणा गांव स्थित भोलादास अखाड़े में भेज दिया। वहां पर सागर ने शरीर को अभ्यास की भट्ठी में तपा कर फौलाद बना लिया। इसी का नतीजा है कि अब वे 68 किलोग्राम में 22 से 24 नवंबर को चीन में होने वाली सब जूनियर एशियन कुश्ती चैंपियनशिप में पदक जीतने के लिए उतरेगा।

कुश्ती कोच अश्विनी दहिया ने बताया कि सागर को जो तकनीक बताई जाती है उसे पूरा करके ही दम लेता है। अगर उसे कोई प्रतिद्वंदी हरा देता है। अगली बार उसे हराकर ही शांत होता है। इसी जिद्द की वजह से दोस्तों ने सागर का नाम कट्टर रखा है। तीन महीने पहले नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप में सागर को उत्तर प्रदेश के रमन ने हरा दिया था। सागर ने ट्रायल में रमन को हराकर एशियन चैंपियनशिप के लिए जगह बनाई। वह हर रोज सात घंटे अभ्यास करता है। तैयारी को देखते हुए उम्मीद है कि सागर देश को पदक दिलाएगा।

पिता के सपने को पूरा करना है, फीतले दांव है पसंद 

सागर ने बताया कि जब भी उसे गुस्सा आता है। वह और कड़ा अभ्यास करके अपने ही शरीर पर गुस्सा निकाल देता है। ये उसके लिए कारगर भी साबित हुआ है। उनके पिता मुकेश जागलान राज्यस्तरीय कुश्ती चैंपिनशिप में खेल चुके हैं। इससे आगे न बढ़ पाने का पिता को मलाल था। वह एशियन चैंपियनशिप में पदक जीतकर पिता और दादा रणधीर सिंह के सपने को पूरा करना चाहता है। फीतले दांव उसका पसंदीदा दांव है। इसमें महारत हासिल करने के लिए वह रोज 100 बार प्रयास करता है। 

Posted By: Anurag Shukla

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