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पानीपत में फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के बाद भी ड्रेन में प्रदूषण बरकरार, अभी भी बह रहा केमिकल का पानी

Published: Wed, 14 Oct 2026 10:43 PM (IST)

फैक्ट्रियों पर कड़ी कार्रवाई और जुर्माने के बावजूद पानीपत की ड्रेन नंबर-2 में औद्योगिक केमिकल युक्त अपशिष्ट पहुंचना जारी है, जिसमें अवैध टैंकरों से डंपिंग भी शामिल है।

फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के बाद भी ड्रेन में प्रदूषण बरकरार।

फैक्ट्रियों पर कार्रवाई के बाद भी ड्रेन में प्रदूषण बरकरार।

HighLights

  1. औद्योगिक प्रदूषण रोकने के बावजूद ड्रेन में केमिकल अपशिष्ट।

  2. अवैध टैंकरों से अपशिष्ट डालने के मामले सामने।

  3. यह पानी यमुना नदी तक पहुंच रहा, चिंताजनक।

जागरण संवाददाता, पानीपत। औद्योगिक प्रदूषण पर अंकुश लगाने के लिए छापेमारी, फैक्ट्रियों को सील करने और पर्यावरणीय मुआवजा लगाने जैसे सख्त कदम उठाए गए, लेकिन ड्रेन नंबर-2 में केमिकल युक्त अपशिष्ट पहुंचने की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।

टैंकरों के जरिये औद्योगिक अपशिष्ट डालने के मामले सामने आने से प्रदूषण नियंत्रण के इंतजामों में सुस्ती नजर आ रही हैं। सरकार द्वारा मार्च 2025 में बताया था कि पानीपत में ड्रेन नंबर-2 तक बिना शोधन औद्योगिक अपशिष्ट पहुंचाने वाले 105 प्वाइंट चिह्नित किए गए थे।

इनमें से 48 को बंद करने की जानकारी दी गई थी, जबकि शेष 57 पर कार्रवाई की प्रक्रिया जारी थी। प्रदूषण विभाग के अधिकारियों द्वारा तीन वर्षों में नियमों का उल्लंघन करने वाली 27 औद्योगिक इकाइयों को बंद या सील किया गया था। छह इकाइयों पर नौ करोड़ रुपये से अधिक का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था।

इसके बाद नवंबर 2025 में सीएम फ्लाइंग और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की संयुक्त टीम द्वारा जिले के कुराड़ क्षेत्र में छापा मारकर 13 ट्रैक्टर-टैंकर पकड़े थे। इसमें सात फैक्ट्री संचालकों समेत 27 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। इसके बाद औद्योगिक इकाइयों को बंद करने की सिफारिश भी की गई थी।

ड्रेन से यमुना तक पहुंचता हैं पानी

जिले के कुराड़, छाजपुर और जलालपुर क्षेत्र में औद्योगिक अपशिष्ट के अवैध निस्तारण की शिकायतें पहले भी सामने आ चुकी हैं। इन गांवों के ग्रामीणों द्वारा बताया कि रात के समय टैंकरों से अपशिष्ट नालों में डालने की शिकायतें की हैं। इसके बाद प्रदूषण विभाग के अधिकारी निगरानी भी रख रहे हैं।

ड्रेन नंबर-1 का पानी आगे ड्रेन नंबर-2 में मिलता हैं और फिर खोजकीपुर के पास यमुना में पहुंचता हैं। ऐसे में औद्योगिक अपशिष्ट का अनुचित निस्तारण नदी की जल गुणवत्ता के लिए भी चिंता का विषय हैं।