पानीपत में मां की मौत के बाद नवजात बेटे पर दो परिवारों ने ठोका दावा, 20 हजार रुपये लेकर पड़ोसी ने सौंपा बच्चा
मां की मौत के बाद पानीपत में नवजात बेटे की कस्टडी को लेकर दो परिवारों में विवाद हो गया। पड़ोसी ...और पढ़ें

पानीपत में मां की मौत के बाद नवजात की कस्टडी पर विवाद, 20 हजार में सुलझा मामला।
HighLights
मां की मौत के बाद नवजात बच्चे की कस्टडी को लेकर विवाद।
पड़ोसी परिवार ने महिला के इलाज पर 70 हजार रुपये खर्च किए।
पुलिस की मध्यस्थता से 20 हजार रुपये में समझौता, बच्चा सौंपा।
जागरण संवाददाता, पानीपत। शहर की सैनी कॉलोनी में एक महिला की मौत के बाद उसके नवजात बेटे की कस्टडी को लेकर दो परिवारों में विवाद हो गया। बिहार से पहुंचे ससुराल पक्ष के लोग बच्चे को अपने साथ ले जाने लगे तो पड़ोसी परिवार ने उसे अपने पास रखने की जिद पकड़ ली।
पड़ोसी परिवार का दावा था कि उन्होंने महिला के इलाज पर करीब 70 हजार रुपये खर्च किए हैं। परिवार में कोई बच्चा नहीं होने के कारण वे नवजात को अपने पास रखना चाहते थे। विवाद थाने पहुंचा तो दोनों पक्षों के बीच बातचीत हुई। इसके बाद 20 हजार रुपये लेकर पड़ोसी परिवार ने बच्चा स्वजन को सौंप दिया।
मूलरूप से बिहार के छपरा की रहने वाली 27 वर्षीय संध्या पिछले कई महीनों से पानीपत की सैनी कॉलोनी में रह रही थी। उसके साथ 10 और छह साल की दो बेटियां तथा तीन साल का बेटा था। वह एक फैक्ट्री में क्लिपिंग का काम करके परिवार का गुजारा कर रही थी। उसका पति पंकज उससे अलग रहता था।
संध्या ने 23 अक्टूबर को चौथे बच्चे के रूप में बेटे को जन्म दिया था। इसके बाद उसकी तबीयत खराब रहने लगी। पड़ोसी परिवार उसकी देखभाल कर रहा था। वे उसे इलाज के लिए निजी और सरकारी अस्पतालों में लेकर जाते थे। एक नवंबर को ब्लीडिंग होने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाने लगे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। तीन नवंबर को पानीपत में उसका अंतिम संस्कार किया गया।
70 हजार खर्च करने की कही बात, 20 हजार में हुआ समझौता
पडोसी के अनुसार, उन्होंने संध्या के इलाज पर करीब 70 हजार रुपये खर्च किए थे। नवजात की देखभाल भी उनका परिवार कर रहा था। परिवार भावनात्मक रूप से बच्चे से जुड़ गया था और उसे अपने पास रखना चाहता था। बिहार से आए स्वजन जब बच्चे को ले जाने लगे तो पड़ोसी परिवार ने खर्च की गई रकम लौटाने की बात कही।
इस पर विवाद हो गया और मामला थाने पहुंच गया। पुराना औद्योगिक थाना प्रभारी अरविंद ने बताया कि पुलिस को किसी भी पक्ष की ओर से लिखित शिकायत नहीं मिली थी। दोनों पक्षों के बीच पैसों के लेनदेन को लेकर विवाद था, जिसे बातचीत से सुलझा लिया गया। इसके बाद 20 हजार रुपये देने पर पड़ोसी परिवार ने बच्चा स्वजन को सौंप दिया।
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