विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

हरियाणा में मंडराया सांसों पर सकंट... पराली नहीं, चिमनियों का धुआं और सड़कों की धूल बनी विलेन; AQI 109 पार

Published: Tue, 06 Oct 2026 10:32 AM (IST)

पानीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 109 पार होने के बाद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP-1) लागू कर दिया गया है। इस बार पराली नहीं।

HighLights

  1. पानीपत में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 109 के पार

  2. प्रदूषण नियंत्रण हेतु GRAP-1 की पाबंदियां लागू की गईं

  3. चिमनियों का धुआं और सड़कों की धूल मुख्य प्रदूषक

जागरण संवाददाता, पानीपत। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में अक्टूबर की शुरुआत के साथ ही हवा की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप) के पहले चरण की पाबंदियां लागू हैं।

सड़कों पर पानी का छिड़काव और एंटी-स्माग गन चलाने की तैयारी है। हालांकि, इस बार प्रदूषण के कारणों में पराली का धुआं प्रमुखता से सामने नहीं आया है।

कृषि विभाग के अनुसार जिले में अब तक फसल अवशेष जलाने की एक भी घटना दर्ज नहीं हुई है। जिले में 2.25 लाख एकड़ में धान की खेती हुई है। खेतों से निकलने वाले अवशेष का मशीनों की मदद से प्रबंधन किया जा रहा है।

बड़ी मात्रा में पराली का इस्तेमाल पशुचारे के रूप में भी किया जा रहा है। इसके अलावा टेक्सटाइल फैक्ट्रियों में भी पराली का प्रयोग किया जा रहा है।

शहर में लगातार बढ़ रहे वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआइ) और प्रदूषण के स्तर को देखते हुए नगर निगम पानीपत ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (ग्रैप-1) के तहत सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

सोमवार को नगर निगम आयुक्त डॉ. पंकज राव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में प्रदूषण नियंत्रण के लिए विभिन्न विभागों को विशेष निर्देश जारी किए। बैठक में कार्यकारी अभियंता रुपेश, सुमित नांदल, गोपाल कलावत, नवीन सहरावत, डीटीपी जितेंद्र सिंह, सीएसआई जितेंद्र नरवाल, एई दीपक राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

आयुक्त ने कहा कि बढ़ते एक्यूआइ को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण संबंधी सभी उपायों को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए और फील्ड स्तर पर नियमित निगरानी रखी जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ग्रैप-1 के दौरान किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आयुक्त ने भवन निर्माण स्थलों पर ग्रीन नेट और ग्रीन मैटिंग लगाने के निर्देश दिए।

एक्यूआइ बढ़ा तो समझें हवा हो रही

खराब केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारियों ने बताया कि 0-50 एक्यूआइ अच्छा, 51-100 संतोषजनक, 101-200 मध्यम, 201-300 खराब, 301-400 बहुत खराब व 401-500 गंभीर श्रेणी में आता है। 100 तक की हवा सामान्यतः ठीक मानी जाती है। 101 से 200 के बीच संवेदनशील लोगों को परेशानी।

200 से ऊपर पहुंचने पर स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर बढ़ने लगता है। 300 से ऊपर लंबे समय तक रहना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा नुकसानदायक है। 400 से ऊपर की हवा गंभीर स्तर की मानी जाती है और सभी लोगों के लिए स्वास्थ्य जोखिम बढ़ जाता है।

सड़क की धूल भी बनी परेशानी

शहर में टेक्सटाइल और डाइंग इकाइयों में ईंधन के रूप में बायोमास और पराली ब्रिक्स का इस्तेमाल बढ़ा है। कोयले पर प्रतिबंध के बाद दूसरे राज्यों से आने वाले इन ईंधनों का प्रयोग किया जा रहा है। चिमनियों से निकलने वाले धुएं का उचित नियंत्रण नहीं होने पर हवा प्रभावित हो सकती है। औद्योगिक वाहनों की आवाजाही और सड़कों पर जमा महीन धूल भी प्रदूषण बढ़ाने में भूमिका निभा रही है। अक्टूबर में हवा की गति कम होने से प्रदूषक कण वातावरण में नीचे ही ठहरने लगते हैं।