पानीपत, जेएनएन। पानीपत-जींद ट्रैक पर इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने का ट्रायल सफल रहा। कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) के नेतृत्व में अधिकारियों की टीम ने स्पेशल ट्रेन में पानीपत से जींद तक के ट्रैक की जांच की। टीम के साथ डीआरएम आरएन सिंह भी मौजूद रहे। अब ट्रायल की रिपोर्ट दिल्ली में वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों को सौंपी जाएगी। उनकी रिपोर्ट के आधार पर इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा।

दिल्ली मंडल के कमिश्नर ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) शैलेश कुमार पाठक अपनी टीम सहित सुबह 9:40 बजे पानीपत रेलवे स्टेशन से रवाना हुए। वे सवा दो बजे जींद पहुंचे। उसके बाद शाम पांच बजे वापस पानीपत लौटे। यहां से ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हो गए। इस ट्रेन का इंजन फूलों से सजाया हुआ था।

ठीक रहा सफर
स्टेशन अधीक्षक धीरज कपूर ने बताया कि पानीपत से जींद तक का सफर ठीक रहा है। निरीक्षण के दौरान कहीं कोई परेशानी नहीं आई। सीआरएस की टीम दिल्ली पहुंचकर सीनियर अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। उसके बाद इस ट्रैक पर ईएमयू दौड़ेंगी।

इलेक्ट्रिक ट्रेन चलने से फायदा
इलेक्ट्रिक इंजन लगने से बाद ट्रेन की स्पीड बढ़ेगी
इस लाइन पर एक्सप्रेस ट्रेन चलने का रास्ता भी खुल जाएगा 
सवारियों को डीजल ईंजन के धुएं से मिलेगी राहत
पानीपत जींद में आवाजाही सुगम होगी

अधिक ट्रेन बढ़ने की उम्मीद
अभी खुखराना तक विद्युतीकरण पानीपत से खुखराना तक विद्युतीकरण हो चुका है। इसके बाद जींद तक ट्रेन डीजल के ईंजन से जाती है। पानीपत से जींद तक हर रोज डीजल इंजन से छह पैसेंजर ट्रेन चलती हैं। पानीपत से जींद 10 हजार से अधिक लोगों का आना जाना होता है। इनमें से ज्यादातर सवारियां बसों अथवा निजी वाहनों से आती है। सफर में करीब दो घंटे लगते हैं। इस कारण से भी लोग अन्य वाहनों से सफर करने पर मजबूर हैं। ईएमयू ट्रेन की स्पीड ज्यादा होने के कारण यात्रियों को करीब 40 मिनट की बचत होने की उम्मीद है।

पानीपत से जींद बस किराया 60 रुपये ट्रेन में मात्र 20 रुपये
पानीपत से जींद में बस किराया 60 रुपये एक साइड के लगते हैं जबकि ट्रेन का किराया 20 रुपये हैं। छह से ज्यादा ट्रेन चलने पर अधिक सवारियां ट्रेन से आवाजाही करेंगी। 14 स्टेशनों पर जाने वाले यात्रियों को फायदा पानीपत से जींद के बीच 14 स्टेशन आते हैं। बिजली इंजन से ट्रेन चलने पर 14 स्टेशनों की यात्रियों को फायदा पहुंचेगा। इनमें खुखराना, मतलौडा, नारा हाल्ट, करसिंधु, सफीदों, बूढ़ाखेड़ा, पिल्लू खेड़ा, सिवाहा, पांडू ¨पडारा, जींद सिटी, जींद जंक्शन शामिल हैं।

ईएमयू दौड़ने में लगेगा समय
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि ट्रायल में जो कमियां रह गई है उन्हें ठीक किया जाएगा। अभी ट्रेन चलने में समय लगेगा। डेढ़ माह पूर्व कुरुक्षेत्र नरवाना के बीच रेलवे ट्रैक का विद्युतीकरण किया जा चुका है। इस ट्रैक का ट्रायल भी हो चुका है, लेकिन अभी तक ट्रेन नहीं चली है।

31 मार्च तक पानीपत रोहतक लाइन का विद्युतीकरण
पानीपत रोहतक लाइन का विद्युतीकरण का काम जोरों पर है। लाइन पर पोल लगाने का काम पूरा हो चुका है। तार बिछाई जा रही है। इसे पूरा करने का समय 31 मार्च निर्धारित किया गया है।

प्रदूषण जीरो होगा
पानीपत जींद ट्रैक पर बिजली इंजन से ट्रेन चलने पर प्रदूषण स्तर जीरो होगा। इस ट्रैक पर डीजल ईंजन से ट्रेन चलने से वायु प्रदूषण होता है। तेल के भंडार सीमित है। इसीलिए आधुनिक तकनीक को प्रयोग किया जा रहा है। बिजली की ट्रेन चलाई जा रही है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि बिजली ईंजन से ट्रेन चलने पर 25 फीसद तक की बचत रेलवे को होगी।

साइंटिस्ट डॉ. पीकेएमके दास का कहना है कि डीजल इंजन के स्थान पर इलेक्ट्रिक ईंजन से ट्रेन चलने पर वायु प्रदूषण से बचाव होगा। वातावरण में विशैली गैस नहीं जाएगी। छह ट्रैन में पानीपत से जींद जाने में यदि छह हजार लीटर डीजल लगता है। तो उस ट्रैन से 100 ट्रकों द्वारा छोड़े गए धुएं से होने वाले प्रदूषण के समान प्रदूषण होगा। इलेक्ट्रिक ट्रेन से स्वस्थ वातावरण मिलेगा। डीजल ईँजन से एसओ-2, एसपीएम, एनओएक्स तीन तरह की गैंसे निकलती है।

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