जागरण संवाददाता, पानीपत : घरेलू हिसा, दुष्कर्म आदि केसों की पीड़िताओं के लिए रेडक्रॉस सोसाइटी की बिल्डिग में खुला वन स्टॉप (सखी) सेंटर दिखावा साबित हो रहा है। छोटे तीन कमरों में अस्थाई रूप से बने सेंटर में पांच बेड सहित अन्य फर्नीचर तो पहुंच गया, लेकिन रखने के लिए पर्याप्त जगह ही नहीं है। स्टाफ की नियुक्ति भी नहीं हो सकी है। इधर, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर आचार संहिता कभी भी लागू हो सकती है, नियुक्ति प्रक्रिया पर ग्रहण तय है।

सरकार ने वर्ष 2014 में प्रदेश के हर जिले में वन स्टॉप सेंटर बनाए जाने की घोषणा की थी। इनमें घरेलू हिसा, दुष्कर्म, यौन शोषण, एसिड अटैक, दहेज उत्पीड़न आदि केसों में पीड़ित महिलाओं को पांच-छह दिन ठहरने सहित चिकित्सा, पुलिस और कानूनी मदद मिलनी थी।

नए सेंटर के लिए जमीन तय लेकिन नहीं ले सके एनओसी

जुलाई 2018 में सरकार ने सेंटर शुरू करने के लिए पुन: महिला एवं बाल विकास विभाग को आदेश दिए थे। सेंटर सिविल अस्पताल परिसर या उसके दो किमी. दायरे में खोला जाना था। गांव अजीजुल्लापुर-नूरवाला में करीब 350 वर्ग मीटर जमीन चयनित की गई है। निर्माण कार्य के लिए निर्भया फंड से 19 लाख रुपए जिला प्रशासन के पास आ चुके हैं। विभागीय अधिकारी नगर निगम से अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं ले सके। एनओसी के बाद भवन का नक्शा पास होगा। टेंडर जारी होंगे तब कहीं निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। विधानसभा चुनाव सिर पर होने से वन स्टाप सेंटर निर्माण कार्य शुरू होने की की उम्मीद अधिकारियों को भी कम ही है। न सुविधा न स्टाफ

रेडक्रॉस सोसाइटी की बिल्डिग में अस्थाई रूप से खोले गए सेंटर की प्रबंधक ईशा की नियुक्त करीब एक माह पहले हो चुकी है। फिजिशियन, लीगल एडवाइजर, दो पुरुष गार्ड, तीन महिला हेल्पर, दो एएनएम की नियुक्ति नहीं हो सकी है। पुलिस तैनाती भी नहीं की गई है। वर्जन :

गार्ड सहित स्टाफ की मांग बार-बार की जा रही है। सुरक्षा नहीं होने से कारण पीड़ित महिलाओं को करनाल भेजा जा रहा है। सेंटर चौबीसों घंटे खुलना चाहिए, स्टाफ नहीं होने से सुबह नौ से शाम पांच बजे तक खोला जा रहा है।

ईशा, सेंटर प्रबंधक

Posted By: Jagran

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