जागरण संवाददाता, पानीपत : राष्ट्रीय श्रवण जागरूकता अभियान तीन से 21 मार्च तक चलेगा। इस दौरान नवजात बच्चों की स्क्रीनिग होगी। बुजुर्गों सहित सभी मरीजों की श्रवण शक्ति जांची जाएगी। प्रत्येक बुधवार को दिव्यांगों के कानों की जांच होगी। जरूरतमंदों को जिला रेडक्रास सोसाइटी और जनसेवा दल के माध्यम से श्रवण मशीन मुहैया कराई जाएगी।

डिप्टी सिविल सर्जन डा. शशि गर्ग ने बताया कि भारत में प्रति एक लाख आबादी पर 291 व्यक्ति ऐसे हैं जो सुनने में असक्षम हैं। इनमें शून्य से 14 वर्ष तक की आयु के बच्चों-किशोरों की संख्या अधिक है। ऐसे में नवजात के कानों की स्क्रीनिग का विशेष महत्व है। अनुवांशिक,जन्म से जटिलताओं, संक्रामक रोगों, कान में लंबे समय तक संक्रमण, दवाओं के उपयोग, अत्यधिक शोर और बढ़ती उम्र बहरापन का कारण हो सकती है। विशेष अभियान के दौरान मरीजों के कानों की जांच के साथ स्पीच थैरेपी, काउंसलिग जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाएंगी।

ऐसे परखें बच्चे की श्रवण शक्ति

तीन माह की आयु में : ऊंची आवाज में प्रत्युत्तर देना। जोर का धमाका होने पर पलक झपकना। नजदीक शोर होने पर अचानक जागना।

छह माह की आयु में :मां के बोलने पर पीछे मुड़कर देखना। आवाज के प्रति कोई रुचि नहीं दिखाना। ध्वनि के स्त्रोत को सिर या आंखों की गतिशीलता से निर्धारित करना।

नौ माह का होने पर :माता-पिता के बोले छोटे शब्द आओ-जाओ को समझना। आवाज करने वाले खिलौनों में रुचि। तुतलाहट जैसी ध्वनि निकालना।

पंद्रह माह का होने पर : नाम पुकारने पर प्रत्युत्तर देना। मां, पिता, दादा जैसे छोटे शब्द बोलना। दूसरों के शब्दों की नकल करना।

दो साल की आयु में : साधारण निर्देश जैसे नाक को छुओ, अपना पेट दिखाओ आदि का जबाव देना।

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