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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 29, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

पड़ोसी राज्य में नशा मुक्ति केंद्रों में बंधक हैं यमुनानगर के कई युवा, एसपी ने दिए रेस्क्यू के आदेश

By Anurag ShuklaEdited By:
Published: Fri, 29 Oct 2021 05:04 PM (GMT+05:30)

नशा मुक्ति मुहिम की बैठक में पड़ोसी राज्‍यों में नशा छुड़ाने के नाम पर बंधक युवाओं का मामला उठा था। ...और पढ़ें

नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर फर्जीवाड़ा।
नशा मुक्ति केंद्र के नाम पर फर्जीवाड़ा।

यमुनानगर, जागरण संवाददाता। नशा मुक्ति मुहिम के तहत नशा छोड़ने के लिए रोजाना युवा आगे आ रहे हैं। मंगलवार को हुई रिव्यू बैठक में भी 15 युवक पहुंचे। यह सभी नशा छोड़ना चाहते हैं। जिस पर पुलिस की ओर से इन युवाओं को काउंसलिंग व इलाज के लिए सिविल अस्पताल में भिजवाया गया। इसके साथ ही इस मुहिम में कुछ और नए समाजसेवी संगठन भी जुड़े। बैठक के दौरान कई लोग ऐसे आए। जिन्होंने अपने बच्चों का नशा छुड़वाने के लिए उत्तर प्रदेश के सहारनपुर के झरौली में किसी नशा मुक्ति केंद्र में छोड़ा हुआ था।

स्वजनों ने नशा मुक्ति के नाम से चल रहे इस केंद्र में बच्चों को प्रताड़ित किए जाने की बात कही। इस पर एसपी कमलदीप गोयल ने तुरंत संज्ञान लिया और पुलिस टीम को साथ लेकर समाजसेवी संगठन के सदस्यों को मौके पर जाने के आदेश दिए। जिससे वहां से जिले के युवकों को रेस्क्यू किया जा सके। इसके साथ ही सहारनपुर के एसपी को भी इस केंद्र के बारे में शिकायत देने के निर्देश दिए।

मंगलवार को नशा मुक्ति मुहिम के तहत बैठक चल रही थी। इस दौरान समाजसेवी संगठनों के साथ कुछ लोग आए हुए थे। एसपी ने उन लोगों से बात की, तो उन्होंने बताया कि उनके बच्चे स्मैक का नशा करते हैं। जिस पर झरौली में चल रहे नशा मुक्ति केंद्र में उनका भर्ती कराया हुआ है। वहां पर उन्हें बच्चों से मिलने भी नहीं दिया जाता। बच्चों को पीटा जाता है। अब इन बच्चों को वहां से वापस भी नहीं आने दिया जा रहा है। तीन हजार रुपये प्रति माह के हिसाब से उनसे नशा छुड़वाने के नाम पर लिए जा रहे हैं। जिस पर एसपी कमलदीप गोयल ने यहां तक पूछा कि इस नशा मुक्ति केंद्र में कोई डाक्टर है या नहीं। इसका भी स्वजनों के पास कोई जवाब नहीं था। जिस पर एसपी ने कहा कि नशा छुड़वाने का यह तरीका ठीक नहीं है। इसके लिए नियमित इलाज चलता है।

डाक्टर ही नशे की लत के शिकार युवा का इलाज कर सकते हैं। इसके साथ ही एसपी ने ड्रग डिएडिक्शन हेल्पलाइन को देख रहे एसआइ सतपाल को निर्देश दिए कि वह एनजीओ के सदस्यों व लोकल पुलिस को लेकर मौके पर जाए और वहां से युवाओं को रेस्क्यू कराकर लाए। इन युवाओं का यहां पर सही तरीके से इलाज कराया जाएगा।

149 काल आ चुकी हेल्पलाइन पर 

जिले में नशा मुक्ति मुहिम के तहत शुरू की गई हेल्पलाइन पर अब तक 149 काल आ चुकी हैं। इसके साथ ही अब तक 87 रजिस्ट्रेशन उन युवाओं के हो चुके हैं, जो नशा छोड़ना चाहते हैं। इनमें से 78 का इलाज शुरू करा दिया है। एसपी कमलदीप गोयल ने समाजसेवी संगठनों से अपील की है कि जिन युवाओं का इलाज चल रहा है। उनका निरंतर फालोअप किया जाना चाहिए। यदि उस युवा या उसके परिवार को कोई दिक्कत आ रही है, तो उनकी काउंसलिंग भी समय-समय पर होनी चाहिए।

पब्लिक पुलिसिंग बनकर करें कार्य : बी मोहन

सेवानिवृत्त प्रोफेसर डा. बी मदन मोहन भी बैठक में पहुंचे थे। उन्होंने नशे से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जानकारी दी। साथ ही समाजसेवी संगठनों व नशा करने वाले युवाओं को भी जागरूक किया। उन्होंने कहा कि पब्लिक पुलिसिंग की जरूरत है। समाज की बुराई दूर करना केवल पुलिस का ही कार्य नहीं है। इसमें सभी लोगों को सहयोग करना होगा। यदि क्षेत्र में कोई व्यक्ति नशा बेच रहा है, तो वहीं के पांच से सात लोगों को एकत्र होकर उसे समझाना चाहिए कि वह यह कार्य न करें। जब लोग खुद जागरूक हो जाएंगे और गलत कार्य का विरोध करेंगे, तो समाज में निश्चित रूप से सुधार होगा। इस दौरान मुहिम के कोर्डिनेटर एडवोकेट सुशील आर्य, डा. नरेंद्र साही, शशि गुप्ता, रमेश मंगा, शालू चौहान, सोनू, रोहित, आमिर अल्वी, मुरसलीन खान, स्नेहलता, अनुराधा, अश्विनी शर्मा, उधम सिंह, सुभाष गौड, सतीश चुघ, हरीश मेंहदीरत्ता, प्रवीण अग्रवल भी मौजूद रहे।