जागरण संवाददाता, पानीपत: सिविल अस्पताल में न डॉक्टर न दवा। अव्यवस्थाएं खुद मर्ज बन गई हैं। बारह दिन पहले खुला प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र करीब 600 तरह की मेडिसिन के अभाव में सिसक रहा है। यह हम नहीं बल्कि सिविल अस्पताल से निराश लौट रहे मरीजों का दर्द है। रेडियोलॉजिस्ट की ड्यूटी पोस्टमार्टम हाउस में लगाने से करीब 80 गर्भवती और 30 बीमार सरकार को कोसते हुए घरों को लौट गए।

दिन सोमवार, समय सुबह करीब पौने दस बजे। अस्पताल की पर्चा विडो पर मरीजों-तीमारदारों की लंबी कतार हुई है। ये हालात तब थे जब हड्डी व त्वचा रोग से पीड़ित और अल्ट्रासाउंड कराने आए मरीजों के पर्चे नहीं बनाए जा रहे थे। पूर्व की भांति मेडिसिन ओपीडी के बाहर दोहरी लाइन थी, एक डॉक्टर कुछ देरी से ओपीडी में पहुंचे। रेडियोलॉजी विभाग में सुबह के समय एक्स-रे मशीन नहीं चली। रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजीव मान की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगी थी।

गर्भवती महिलाओं और मरीजों अल्ट्रासाउंड नहीं हो सके। इमरजेंसी के सामने बेतरतीब खड़े वाहन, मेल-फीमेल वार्ड में गंदगी अव्यवस्था बयां करती दिखी। एमएस डॉ. आलोक जैन ने बताया कि डॉ. नारायण डबास नहीं थे इसलिए डॉ. राजीव मान की ड्यूटी पोस्टमार्टम में लगाई गई। एसएनसीयू में हर समय भीड़भाड़

अस्पताल की नई बिल्डिग में अस्थाई रूप से बनाए गए सिक न्यू बोर्न चाइल्ड केयर यूनिट (एसएनसीयू) में कंप्यूटर कक्ष खोला हुआ है। यहां जन्म लेने वाले, भर्ती, रेफर और डिस्चार्ज हुए नवजातों का डाटा रखा जाता है। नवजातों की जन्मपत्री भी बनाई जाती है। इसके चलते यहां लोगों का आवागमन बना रहता है। इससे पहले से बीमार नवजातों को संक्रमण का खतरा बना हुआ है। स्टाफ मौखिक रूप से इसकी शिकायत अस्पताल प्रशासन से कर चुका है। मेडिकल बायोवेस्ट परिसर का होगा सुधार

पुरानी मोर्चरी वाले हिस्से को अस्पताल प्रशासन सामान्य कचरा डालने के लिए इस्तेमाल कर रहा है। बड़ा कूड़ेदान होने के बावजूद कई बार कचरा बिखरा रहता है, बरसात में गंदगी और बदबू हो जाती है। अब यहां पक्के चार केबिन बनाए जाएंगे। हरा, लाल, नीला और काले रंग के डस्टबिन रखे जाएंगे। खड़ंजा लगेगा। इसके लिए सोमवार को डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोडिया, डॉ. चेतना ने निरीक्षण कर मैप तैयार किया। सी-पेप मशीन इंस्टॉल, नवजातों को मिलेगी कृत्रिम सांस

एसएनसीयू को दान में मिली एक लाख रुपये कीमत की सी-पेप मशीन सोमवार को इंजीनियरों ने इंस्टॉल कर दी। शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. निहारिका ने पुष्टि करते हुए बताया कि अधिकांश नवजातों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इस मशीन के जरिए कृत्रिम ऑक्सीजन दी जा सकेगी। नवजातों को रेफर नहीं करना पड़ेगा। बायोवेस्ट के लिए खोजा जा रहा विकल्प

एसएनसीयू में भीड़ का मामला संज्ञान में है। बहुत जल्द बाहर एक केबिन बनाया जाएगा। मेडिकल बायोवेस्ट और सामान्य कचरा बिखरा न रहे, इसके लिए सभी स्तर पर काम किया जा रहा है।

डॉ. अमित पोडिया, डिप्टी एमएस

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Posted By: Jagran

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