पानीपत [राज सिंह]। आयुष्मान भारत योजना 2018 में निजी अस्पतालों की हेराफेरी की शिकायतें मिलने पर सरकार ने अब पात्र मरीज का केवाइसी (नो योर कस्टमर) जरूरी कर दिया गया है। पात्र मरीज के भर्ती और डिस्चार्ज होने पर उसके फिंगर प्रिंट मिलान किए जाएंगे। फिंगर की स्क्रीनिंग नहीं होने पर रेटिना से केवाइसी होगा।

पानीपत जिले में आयुष्मान भारत के 75 हजार 392 पात्र परिवार हैं। इन परिवारों से करीब पौने चार लाख सदस्य योजना से जुड़े हैं। सभी का गोल्डन कार्ड बनना है, ताकि पैनल में शामिल 35 सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का सालाना फ्री इलाज करा सकें। अब तक लगभग 55 हजार पात्रों के ही गोल्डन कार्ड बने हैं। पात्रों की सुस्ती तोड़ने के लिए ही सक्षम युवाओं की मदद से चौपालों पर जागरुकता कार्यक्रम किए जा रहे हैं। करीब 25 सौ गोल्डन कार्ड आधार से लिंक नहीं हो सके हैं।

अस्पतालों को बायोमीट्रिक मशीन लगानी होगी। बता दें, आयुष्मान भारत योजना के पैनल में सिविल अस्पताल, ईएसआइ अस्पताल,चार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, दो अर्बन हेल्थ सेंटर सहित 35 अस्पताल हैं। अब तक 1270 पात्र दो करोड़ रुपये से अधिक का फ्री इलाज करा चुके हैं।

इसलिए जरूरी है केवाइसी

सरकार को कुछ ऐसी शिकायतें मिली कि कुछ प्राइवेट अस्पताल पात्र मरीज के गोल्डन कार्ड पर उसकी सहमति से अपात्र का इलाज कर रहे थे। अस्पताल प्रबंधन दो फाइल तैयार कर, रिकॉर्ड में पात्र को भर्ती दिखाते थे। कुछ अस्पताल मरीज को वास्तविक भर्ती अवधि से अधिक दिखा रहे थे।

शिकायतों के बाद किया गया अनिवार्य

आयुष्मान भारत योजना के जिला सूचना प्रबंधक सोहन सिंह ग्रोवर का कहना है कि गड़बड़ियों की शिकायतें सरकार तक पहुंची तो केवाईसी अनिवार्य का निर्णय लिया गया। हालांकि, पानीपत में ऐसा कोई मामला सामने नहीं आया है। पैनल में शामिल जिले के अस्पताल बहुत जल्द पात्र मरीज का केवाईसी शुरू कर देंगे।

 

Posted By: Kamlesh Bhatt

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