कुरुक्षेत्र, जागरण संवाददाता। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक अब जिला भर को अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार फसलों की उपयोगिता की तलाश करेंगे। इसके लिए जिला भर के विभिन्न ब्लाक को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर आंकलन किया जाएगा। किसी खास क्षेत्र को विशेष फसल के लिए उपयोगी मानते हुए उस पर कार्य किया जाएगा और इसकी रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों के पास भेजी जाएगी। इसके बाद अन्य विभागों के साथ मिलकर इस पर काम किया जाएगा। वैज्ञानिकों का प्रयास रहेगा कि इस क्षेत्र में ही किसानों का सही मार्गदर्शन किया जाए और किसानों को फायदा पहुंचाने वाली फसलों को बढ़ावा दिया जाए।

गौरतलब है कि कुरुक्षेत्र में शाहाबाद क्षेत्र आलू और सूरजमुखी की पैदावार के लिए पहचाना जाता है तो बाबैन क्षेत्र में फूलों और टमाटर की खेती ज्यादा होती है। इसके साथ ही लाडवा क्षेत्र में भी मटर और थानेसर के भी कई गांवों में मटर और टमाटर की अच्छी खेती की जाती है। इसके साथ ही पिहोवा क्षेत्र के ज्यादातर किसान खुंब उत्पादन से जुड़ने के साथ-साथ सब्जियों पर भी ध्यान दे रहे हैं। जिला भर में ऐसे कई किसान हैं जिन्होंने अलग-अलग फसलों की बिजाई करते हुए प्रदेश भर में एक अलग पहचान बनाई है। यही किसान लगातार कृषि वैज्ञानिकों की मदद ले रहे हैं और कई किसान अब बागवानी में भी अपना हाथ आजमाने लगे हैं। इन किसानों का कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक समय-समय मार्गदर्शन कर रहे हैं।

इस तरह की योजना पर किया जा रहा काम

चौधरी चरण सिंह कृषि विवि हिसार के कृषि विज्ञान केंद्र के वरिष्ठ संयोजक डा. प्रद्युम्मन भटनागर ने बताया कि उच्चाधिकारियों की ओर से निर्देश मिलने पर इस तरह की योजना पर विचार किया जा रहा है। इस तरह की संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। क्षेत्र विशेष में किसी खास फसल के उत्पादन को लेकर कृषि वैज्ञानिक किसानों का मार्गदर्शन करने को लेकर तैयार हैं। इसके लिए वह अपनी ओर से सभी तरह की तैयारियां कर रहे हैं।

Edited By: Rajesh Kumar