जगाधरी (यमुनानगर), संवाद सहयोगी। पंडित बिरजू महाराज के निधन से संपूर्ण कला जगत को नुकसान हुआ है। उन्होंने भारतीय नृत्य कथक को संपूर्ण विश्व में विशिश्ट पहचान दिलाई। जिसे सदियों तक याद रखा जाएगा। यह कहना है पंडित बिरजू महाराज की शिष्या ममता त्यागी का। जो सेक्टर 17 में रहती हैं। उन्होंने वर्ष 1999 से 2000 तक उनसे कथक की तालिम ली। इस दौरान उन्होंने कथक में भाव दृश्य को सीखा।

बकौल ममता त्यागी, पंडित बिरजू महाराज ने 12 साधकों को कथक सीखने के लिए गोद लिया हुआ था। जिसमें वह भी शामिल थी। पंडित जी के आवास पर नोएडा में उन्होंने एक साल तक निशुल्क कथक सीखा गया। जब महाराज जी की तबीयत खराब रहने लगी, तो बडे बेटे को कथक सीखाने का जिम्मा सौंप दिया गया। पंडित जी का सपना था कि भारतीय नृत्य कथक की विरासत को गली-गली तक पहुंचाया जाए। जिसे वे बखूबी पूरा करने में जुटी हुई हैं। ममता त्यागी ने बताया कि अभी तक वे 70 लोगों को कथक की विधा में पारंगत कर चुकी है। सिलसिला यही नहीं थमा है। फिलहाल 40 बालिकाओं को कथक की ट्रेनिंग दे रही हैं।

महाराज के जाने से हो गए अनाथ

ममता त्यागी ने बताया कि पंडित बिरजू महाराज के निधन का समाचार सुनकर वह स्तब्भ रह गई। कथक के दौरान जब भी उसे कोई दिक्कत आती थी, तो वह तुरंत महाराज जी को फोन कर समाधान प्राप्त कर लेती थी। कथक के संबंधित प्रोग्राम करने से पहले वह हमेशा महाराज जी के साथ मंत्रणा करती थी। लेकिन उनके जाने के बाद अब वह स्वयं को अनाथ महसूस कर रही हैं।

बिरजू महाराज जैसा कत्थक सम्राट दोबारा नहीं होगा, यह क्षति अपूर्णीय है : शबनम नाथ

अंंबाला की कथक नृत्यांगना एवं गुरु शबनम नाथ ने कहा कि कथक सम्राट पंडित बिरजू महाराज का निधन एक अपूर्णीय क्षति है। उनके करोड़ों प्रशंसकों की आंखें आज नम हैं। अंबाला में कत्थक नृत्यांगना शबनम नाथ ने कहा कि पंडित बिरजू महाराज को देखना एक तरह से मेरे लिए भगवान की दर्शन करने के समान था। कुछ मौकों पर उनकी लाइव परफारमेंस भी देखी।

शबनम ने आगे कहा कि उनके कार्यक्रमों में प्रशंसकों की भीड़ इस कदर होती थी कि हाल में जिसे जहां जगह मिलती वहां बैठ जाते। मैंने खुद उनकी लाइव परफारमेंस को देखा और उनके कार्यक्रमों को देखकर काफी कुछ सीखा। उनका निधन कला के क्षेत्र में एक ऐसी क्षति है, जिसकी भरपाई करना मुश्किल होगा। उनके जैसा न तो कभी हुआ और न ही आगे कभी होगा। 

Edited By: Rajesh Kumar