यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 19, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पानीपत जेल के बंदी का गीत रिलीज, बदल रही जिदगी
तिनका तिनका फाउंडेशन की पहल से जेलों में शुरू हुए रेडियो स्टेशन के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पानीपत : तिनका तिनका फाउंडेशन की पहल से जेलों में शुरू हुए रेडियो स्टेशन के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। पहले बंदी जहां रेडियो जाकी बने, अब खुद के गीत भी यू ट्यूब पर रिलीज कर रहे हैं। इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है फाउंडेशन की अध्यक्ष डा.वर्तिका नंदा ने। पानीपत जेल में बंद बंदी कशिश ने खुद गीत लिखा और गाया। दक्षिण अफ्रीका के पूर्व राष्ट्रपति स्व.नेल्सन मंडेला को समर्पित करते हुए रविवार को इसे रिलीज कर दिया गया है। गाने की पंक्तियां हैं- तिनका जेल रेडियो ये लेकर आया है, नई आशाएं, नई उमंगें साथ लाया है..। मंडेला की जन्म तिथि 18 जुलाई है, उसी को ध्यान में रखते हुए गीत रिलीज किया।
डा.वर्तिका नंदा ने बताया कि 21 वर्षीय कशिश पिछले डेढ़ साल से पानीपत की जिला जेल में विचाराधीन बंदी है। इस गाने को उसने जेल में बैठकर लिखा और गाया है। यह पहला मौका है जब उसका लिखा कोई गाना किसी मंच पर साझा किया गया है। कशिश का चयन पिछले साल हरियाणा जेल रेडियो में एक जाकी के तौर पर हुआ था। उसका साथी श्रवण भी इन दिनों गाने लिख रहा है। जेल में संगीत और प्रयोग
डा.वर्तिका ने जेलों में बंदियों का चयन किया। उन्हें प्रशिक्षित किया। हरियाणा में कुल 19 जेल हैं, जिनमें से सात में रेडियो लाने का काम पूरा हो चुका है। 2020 से अब तक इन जेलों में आडिशन के बाद 47 बंदियों को रेडियो जाकी की ट्रेनिग दी गई है। राज्य के पहले जेल रेडियो का उद्घाटन पानीपत में हरियाणा के जेल मंत्री रंजीत चौटाला ने किया था। बंदियों में आ रहा बदलाव
पानीतप जेल के अधीक्षक देवी दयाल ने बताया कि जेल रेडियों से बंदियों के जीवन में बदलाव आ रहा है। कहने लगे हैं कि समाज में वापस जाकर अपराध की दुनिया को छोड़ देंगे। डा. वर्तिका ने बताया कि अंबाला जेल और रोहतक जेल से जितेंद के गाने को भी रिलीज किया गया था। इस कड़ी में यह तीसरा गाना है। बता दें कि वर्तिका नंदा जेल सुधारक हैं। तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है। वर्ष 2014 में भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं। जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है। दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कालेज के पत्रकारिता विभाग की प्रमुख हैं।