जागरण संवाददाता,पानीपत : औद्योगिक शहर का वायु और जल प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। ज्यादातर समय एयर क्वालिटी इंडेक्स 150 से अधिक ही रहता है। पर्यावरण कंपनसेशन के मामले एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में चल रहे हैं। यमुना की मानिटरिग भी प्रभावित हो रही है। इन सबका एक ही कारण है प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में स्टाफ का न होना है। बोर्ड में एक एसडीओ ही तैनात है। पांच पद काफी अर्से से रिक्त पड़े हैं। रिकार्ड कीपर तक बोर्ड में उपलब्ध नहीं है। क्लर्क का काम सेवादार से लिया जा रहा है। सैंपल आदि लाने के लिए आउटसोर्स के कर्मचारियों पर निर्भरता है।

ये काम अटके

बोर्ड में स्टाफ की कमी होने के कारण उद्योगों की मानिटरिग भी नहीं हो पा रही है। उद्योगों की चिमनियां लगातार काला धुआं छोड़ रही हैं। अवैध ईधन जलाने का क्रम जारी है। एनजीटी ने पेट कोक, कोयला, लकड़ी जलाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। उद्यमियों ने इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कामन ब्वायलर लगाने की कवायद शुरू की थी, लेकिन 14 उद्योगों में पीएनजी का कनेक्शन लिया जा चुका है। 35 उद्योगों ने आवेदन दिया हुआ है। इस प्रकार सभी उद्योग कामन ब्वायलर पर नहीं जा पाएंगे। नए उद्योगों को पीएनजी पर ही अनुमति मिल रही है। स्टाफ कम होने के कारण पीएनजी पर उद्योगों को लाने का काम गति नहीं पकड़ पा रहा है।

सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का पानी नहीं मिल रहा

उद्योगों में लगातार भूजल का प्रयोग हो रहा है। हुडा प्रशासन नहरी पानी उपलब्ध नहीं करवा पाया है। उद्यमी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट से साफ होने वाले पानी की डिमांड कर रहे हैं। इसके लिए खर्च भी देने के लिए उद्यमी तैयार है। बोर्ड में स्टाफ की कमी होने के कारण यह कार्य भी सिरे नहीं चढ़ पा रहा है।

अनट्रिटिड पानी ड्रेन में डाला जा रहा

घरों तथा उद्योगों से निकलने वाले अनट्रिटिड पानी ड्रेन में डाला जा रहा है, जबकि यह प्रतिबंधित है। इसके लिए टास्क फोर्स भी गठित की जा चुकी है। शहर को पुराने कूड़े के ढेरों से भी मुक्ति दिलाने का काम चल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में स्टाफ की कमी होने के कारण ये काम अटके पड़े हैं।

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बोर्ड में स्टाफ की कमी है। इसकी जानकारी मुख्यालय को दी जा चुकी है। भर्ती प्रक्रिया शुरू होनी है उसके बाद ही स्टाफ मिलने की उम्मीद है। कमलजीत, क्षेत्रीय अधिकारी,

पानीपत।

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