जागरण संवाददाता, पानीपत : पांच कर्मेंद्रियां, पांच ज्ञानेंद्रियां और अहंकार ये 11 प्रवृत्तियां हमारे मन को अज्ञानता से ढंक देती हैं। मन संभलने से मनुष्य अपने आप संभल जाएगा। हमें चलते-फिरते, उठते-बैठते प्रभु स्मरण करते रहना चाहिए। भगवान का नाम ही दुनिया का सर्वोत्तम धन है। ये बातें सेक्टर 12 के सामुदायिक केंद्र में भागवत कथा सुनाते हुए इस्कॉन समिति कुरुक्षेत्र के अध्यक्ष साक्षी गोपालदास महाराज ने कही।

उन्होंने महाराज जड़ भरत और राजा परीक्षित भेंट के वृत्तांत का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान जड़ भरत के असल रूप के दर्शन के बाद राजा परीक्षित उनके समक्ष समर्पित हो गए। उन्होंने कहा कि हे देवात्मा इस राजा के शरीर में प्रवेश करके मैं अहंकार के वश में आ गया था। लेकिन आपके सानिध्य में आकर मैं पवित्र हो गया। मुझे ऐसे सुख की अनुभूति हुई है, जैसे भीषण गर्मी से पीड़ित एक जीवात्मा को शीतल जल में प्रवेश करने के बाद अनुभव होता है। आपके वचनों को सुनकर मेरा अज्ञान नष्ट हो गया। उन्होंने श्रद्धालुओं को महाराज परिक्षित की तरह अपने धन, पद और गरिमा का अहंकार भुलाकर प्रभु भक्ति में लीन होने की बात कही। कार्यक्रम में सोनू गर्ग, प्रदीप बंसल, नीरज अग्रवाल, राकेश मंगला, आशु गुप्ता आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

Posted By: Jagran

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