पानीपत, जेएनएन। जिस हिंदू सम्राट ने मुगल शासकों के दांत खट्टे कर दिए, उसका तिरस्कार हो रहा है। उसकी धरोहरों को न लोग सहेज पा रहे न सरकार। जिस शहर से उसकी यादें जुड़ी हैं, उसी पानीपत से उसके इतिहास का नामोनिशान मिटता जा रहा है। विस्तृत खबर जानने के लिए पढ़ें दैनिक जागरण की ये खबर।

हिंदू राजा सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य के नाम से ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया में बनाए गए पार्क की देखभाल तक नहीं हो पा रही है। ऐसे में पार्क में पत्ते बिखरे हैं। नगर निगम यहां पर झाडू तक लगवाने को तैयार नहीं है। पार्क खस्ता होता जा रहा है। असामाजिक प्रवृति के लोग हेमचंद्र विक्रमादित्य की प्रतिभा का मजाक तक उड़ा रहे हैं। 

कई महीने से नहीं देखने आया कोई 
दैनिक जागरण ने बेहाल धरोहरों को पहचान दिलाने की कड़ी में रविवार को ओल्ड इंडस्ट्रियल एरिया स्थित हेमचंद्र विक्रमादित्य के पार्क की स्थिति जानी। पार्क में चारों तरफ पत्ते बिखरे हुए थे। जिससे लगता था कि कई महीने से झाडू तक नहीं लगाया गया हो। वहीं हेमचंद्र विक्रमादित्य की प्रतिमा पर दो लड्डू और बताशे रखे गए थे। 

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यह है इतिहास 
सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य एक हिन्दू राजा थे। उन्होंने मध्यकाल में 16वीं शताब्दी में भारत पर राज किया था। यह भारतीय इतिहास का एक महत्वपूर्ण समय रहा, जब मुगल व अफगान वंश दोनों ही दिल्ली में राज्य के लिए तत्पर थे। कई इतिहासकारों ने हेमू को भारत का नैपोलियन कहा है। उनकी मृत्यु पानीपत के दूसरे युद्ध में 5 नवंबर 1556 को हुई थी। 

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1991 में बनाए पार्क का 2011 में सुंदरीकरण किया था
सम्राट हेमचंद्र विक्रमादित्य की मूर्ति का अनावरण 29 दिसंबर 1991 को तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने किया था। इसके बाद तत्कालीन विधायक बलबीर पाल शाह ने 25 मार्च 2011 को पार्क का नवीनीकरण करवाया था। इसके बाद किसी ने भी पार्क व प्रतिमा की सुध नहीं ली। 

शहर के जागरूक नागरिक आए थे आगे 
शहर के जागरूक नागरिक धरोहरों की देखभाल के लिए आगे आए थे। उन्होंने पार्क में लगातार तीन दिन तक सफाई अभियान चलाया। यहां से कई ट्राली कूड़े की निकाली थी। नगर निगम ने उस वक्त पार्क की हर रोज सफाई करने का भरोसा दिया था। इसके अलावा पौधरोपण के साथ जरूरी मरम्मत का कार्य किया जाना था। इंसार बाजार के प्रधान गौरव लिखा ने बताया कि प्रशासन और पुरातत्व विभाग को धरोहरों की देखभाल के लिए आगे आना होगा। 

Posted By: Ravi Dhawan

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