यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 30, 2021 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
सांस्कृतिक धरोहर पेंटिग के मध्यम से संजो रहीं हिमानी डावर
सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखना हिमानी डावर की पहचान बन चुकी है। पांच सालों में 150 से ज्यादा पेंटिग बना ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, पानीपत : सांस्कृतिक धरोहर को संजोकर रखना हिमानी डावर की पहचान बन चुकी है। पांच सालों में 150 से ज्यादा पेंटिग बना चुकी हैं। इसमें आगरा का ताजमहल, लाल किला व पंजाब का स्वर्ण मंदिर भी शामिल हैं। माडल टाउन में छाया आर्ट्स अकेडमी की तरफ से चल रही पेंटिग प्रदर्शनी में स्वर्ण मंदिर की पेंटिग चर्चा का विषय बनी हुई है। इस पेंटिग में खास बात यह है कि तीन अलग-अलग माह में कड़ी मेहनत से बनाया गया। आयल पेंटिग है, जिनका प्रयोग मानसून के हिसाब किया जाता है। पेंटिग को बनाने में 44 हजार रुपये का खर्च आया।
चित्रकार हिमानी डावर ने दैनिक जागरण से बातचीत में बताया कि भारत के सभी सांस्कृतिक धरोहर की पेंटिग बनाई जाएगी। इसके लिए अलग से प्लान तैयार किया जाएगा। इसमें पेंटिग को बनाने के लिए समय चाहिए होता है। स्केच वाली पेंटिग तो एक दिन में ही तैयार हो जाती है, लेकिन आयल पेंटिग मानसून पर निर्भर करती है। इसमें तापमान का विशेष ध्यान रखना पड़ता है। पेंटिग की सुंदरता भी अधिक होती है। अमृतसर की स्वर्ण मंदिर पेंटिग में गोल्डन ओयल रंग सबसे महंगा है और अगर सही तापमान न हो तो रंग खराब हो जाता है। जिससे काफी नुकसान होता है। तीन माह में बनी पेंटिग
पेंटिग को बनाने के लिए जून माह में इसको बनाना शुरू किया। इसमें 35 डिग्री अधिक तापमान की जरूरत होती है। जहां आयल से रंग करने के बाद इसे सूखने के लिए भी तेज धूप की जरूरत होती है। इसके बाद ही दूसरे किसी रंग का प्रयोग किया जा सकता है। हिमानी डावर ने कहा कि पंजाब के स्वर्ण मंदिर को शांति का प्रतीक को दर्शाया गया है। कैसे लोग अमृतसर के इस खूबसूरत गोल्डन में प्रवेश कर रहे हैं। पानी में दिखती मनमोहक परछाई जो प्रदर्शित किया गया। अगला लक्ष्य जींद का रानी तालाब की पेंटिग बनाना है।
